( फिलिप चाको जिला ब्यूरो बालोद) बालोद । सावन की पहली अच्छी बारिश ने जहां लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी, वहीं नगर पालिका की तैयारियों को भी पानी-पानी कर दिया। पहली ही बारिश में नगर के कई वार्डों में जलभराव की स्थिति निर्मित हो गई। कहीं सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं तो कहीं बारिश का पानी लोगों के घरों तक पहुंच गया। ऐसा प्रतीत हुआ मानो शहर में जल निकासी की नहीं, बल्कि जलभराव की तैयारी पहले से कर ली गई हो।
सबसे चिंताजनक स्थिति वार्ड क्रमांक 11, जवाहरपारा में देखने को मिली, जहां एक परिवार ने सुबह ही जलभराव की समस्या को लेकर मुख्य नगर पालिका अधिकारी को आवेदन सौंपा था। विडंबना यह रही कि शिकायत पर कार्रवाई होने से पहले ही शाम की बारिश ने घर में दस्तक दे दी और पानी सीधे अंदर घुस गया। अब शहर में चर्चा है कि आवेदन पहले पहुंचा या पानी? क्योंकि राहत तो दोनों में से किसी के साथ भी समय पर नहीं पहुंची।
इसी तरह वार्ड क्रमांक 16, शिकारीपारा सहित नगर के कई अन्य क्षेत्रों में भी सड़कें जलमग्न हो गईं। राहगीरों को यह समझना मुश्किल हो गया कि वे सड़क पर चल रहे हैं या किसी अस्थायी जलाशय का निरीक्षण कर रहे हैं। जलभराव के कारण लोगों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा और कई स्थानों पर वाहन चालकों को भी जोखिम उठाना पड़ा।
नगर में हाल के दिनों में विकास कार्यों के भूमि पूजन, घोषणाओं और बड़े-बड़े दावों की कोई कमी नहीं रही। लेकिन पहली ही बारिश ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया—क्या विकास केवल नारियल फोड़ने और शिलान्यास तक ही सीमित रह गया है? यदि नालियों का निर्माण समय पर पूरा होता, उनकी नियमित सफाई होती और जल निकासी की समुचित व्यवस्था बरसात से पहले सुनिश्चित कर ली जाती, तो शायद लोगों के घरों में पानी घुसने जैसी नौबत नहीं आती।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष बारिश आती है और हर वर्ष जलभराव की समस्या भी सामने आती है, फिर भी स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम दिखाई नहीं देते। ऐसा लगता है मानो नगर पालिका के लिए हर मानसून एक नई और अप्रत्याशित घटना हो। जबकि बरसात से पहले नालियों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करना और अधूरे निर्माण कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करना प्रशासन की मूल जिम्मेदारी है।
अब समय आ गया है कि केवल प्रेस विज्ञप्तियों, फोटो सेशन और भूमि पूजन से आगे बढ़कर धरातल पर परिणाम दिखाई दें। जनता को भाषण नहीं, जलभराव से मुक्ति चाहिए; आश्वासन नहीं, मजबूत और व्यवस्थित नालियां चाहिए; कागजी विकास नहीं, ऐसा शहर चाहिए जहां पहली ही बारिश में सड़कें तालाब और घर जलाशय में तब्दील न हों।
पहली बारिश ने नगर की व्यवस्थाओं का आईना जनता के सामने रख दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार भी पानी सूखने के साथ जवाबदेही भी सूख जाएगी, या फिर नगर पालिका इस चेतावनी को गंभीरता से लेकर समयबद्ध और स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएगी?
बालोद की जनता अब वादों की बारिश नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार की प्रतीक्षा कर रही है। क्योंकि किसी भी शहर का विकास शिलान्यास के पत्थरों से नहीं, बल्कि उन सड़कों, नालियों और मूलभूत सुविधाओं से मापा जाता है जो हर मौसम में जनता को सुरक्षित और सुविधाजनक जीवन प्रदान करें।

