US-Iran Tension: नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की डेडलाइन समाप्त होने से कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने युद्ध विराम को आगे बढ़ा दिया है। ट्रंप ने बुधवार को एलान किया कि ईरान की ओर से प्रस्ताव पेश किए जाने तक वो सीजफायर को आगे बढ़ा रहे हैं।
पाकिस्तान को दिया श्रेय
ट्रंप ने कहा कि वह गंभीर रूप से विभाजित ईरानी शासन को स्थायी शांति समझौते के लिए एक एकीकृत प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए समय देना चाहते हैं। ऐसा पहली बार है जब अमेरिका ने ईरान के अगले कदम के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की है, और ट्रंप ने इस रणनीति में बदलाव का श्रेय पाकिस्तानी नेतृत्व के साथ अपने परामर्श को दिया है।
ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया साइट ‘ट्रुथ’ पर लिखा, “ईरान सरकार के गंभीर रूप से विभाजित होने के तथ्य के आधार पर, जो कि अप्रत्याशित नहीं था, और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कहने पर हमने हमले रोका। यह हमला तब तक स्थगित रहेगा, जब तक कि ईरान के नेता और प्रतिनिधि एक एकीकृत प्रस्ताव के साथ सामने नहीं आ जाते।”
जारी रहेगी नाकाबंदी
लेकिन ट्रंप ने कहा कि होर्मज स्ट्रेट में ईरान के तट पर बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रहेगी, जबकि अमेरिकी सेना अन्य सभी मामलों में तैयार और सक्षम रहेगी। उन्होंने कहा कि युद्धविराम को तब तक बढ़ाया जाएगा जब तक कि उनका प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया जाता और बातचीत किसी न किसी तरह से समाप्त नहीं हो जाती।
पाकिस्तान ने क्या कहा?
वहीं, पाकिस्तान ने भी सीजफायर बढ़ाने के अनुरोध को स्वीकार करने और उसके राजनयिक प्रयासों के लिए ट्रंप को धन्यवाद दिया। आसिम मुनीर ने एक्स पर लिखा, मैं राष्ट्रपति ट्रंप का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने चल रहे राजनयिक प्रयासों को आगे बढ़ने देने के लिए युद्धविराम बढ़ाने के हमारे अनुरोध को सहर्ष स्वीकार कर लिया। मुझ पर जताए गए भरोसे और विश्वास के साथ, पाकिस्तान संघर्ष के वार्तात्मक समाधान के लिए अपने गंभीर प्रयास जारी रखेगा।”
उन्होंने आगे कहा, “मुझे पूरी उम्मीद है कि दोनों पक्ष युद्धविराम का पालन करना जारी रखेंगे और इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता के दूसरे दौर के दौरान संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए एक व्यापक ‘शांति समझौते’ पर पहुंचने में सक्षम होंगे।”
पाकिस्तान को होगा लाभ
गौरतलब है कि वैश्विक शांतिदूत के रूप में अपनी नई भूमिका में पाकिस्तान द्वारा ईरान और अमेरिका के बीच मतभेदों को कम करने के लिए किए जा रहे अथक प्रयासों के पीछे अपनी राजनयिक स्थिति को सुधारना और व्यापार को आकर्षित करना है। हाल के दिनों में पाकिस्तान की आर्थिक कमजोरी स्पष्ट रूप से सामने आई है, जहां देश को पैसे बचाने के लिए रोजाना बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है और सऊदी अरब से 3 अरब डॉलर का आपातकालीन ऋण लेना पड़ा है। यदि इस्लामाबाद वास्तव में ईरान पर और हमले रोकने के लिए ट्रंप का दबाव झेल रहा है, तो इससे उसकी राजनयिक छवि को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा और वैश्विक स्तर पर उसकी जवाबदेही मजबूत होगी।

