शहर से लेकर जिले के कोने-कोने तक इन दिनों चाय की दुकानों पर एक ही चर्चा गरम है—आबकारी विभाग की शराब दुकानों में खुली मनमानी। आम लोगों का आरोप है कि जहां एक पव्वा 80 रुपये का होना चाहिए, वहीं वही पव्वा 120 से लेकर 150 रुपये तक बेचा जा रहा है। कीमत तय है, लेकिन वसूली “मौके और भीड़” देखकर हो रही है।
सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि अंग्रेजी शराब में तो खुलेआम 40–50 रुपये तक अतिरिक्त वसूली की जा रही है। शाम के समय जब भीड़ बढ़ती है, तब तो हाल और भी बेकाबू हो जाता है। ग्राहक अगर थोड़ा भी सवाल पूछ दे, तो सीधे जवाब मिलता है—“नहीं लेना है तो हटो, और भी लोग खड़े हैं।” कई जगह तो बहस करने पर शराब देने से ही मना कर दिया जाता है।
चौंकाने वाली बातें:
तय कीमत से 40–70 रुपये तक ज्यादा वसूली
भीड़ के समय “रेट” अपने हिसाब से तय
सवाल करने पर ग्राहकों को भगा देना
शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं
अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या शिकायतें संबंधित अधिकारियों तक नहीं पहुंच रहीं, या फिर पहुंचकर भी अनसुनी कर दी जा रही हैं? चर्चा तो यहां तक है कि “ऊपर तक सेटिंग” के कारण यह खेल बेखौफ जारी है।
आम जनता में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि अगर यही हाल रहा, तो यह लूट और भी बढ़ेगी और आम आदमी को मजबूरी में जेब ढीली करनी पड़ेगी।
चाय की चुस्कियों के साथ उठता सवाल:
क्या आबकारी विभाग को इन सबकी जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गई हैं?
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस “चाय पर चर्चा” को सिर्फ चर्चा मानकर छोड़ देते हैं, या फिर हकीकत में कोई सख्त कदम उठाते हैं।
पत्रकार दीपक तिवारी

