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CGwatch पेशा कानून छत्तीसगढ़ में धरातल में नहीं ,अंतर सिंह आर्या,अध्यक्ष राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग

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CGwatch पेशा कानून छत्तीसगढ़ में धरातल में नहीं ,अंतर सिंह आर्या,अध्यक्ष राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग

बिलासपुर

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्या ने बिलासपुर में प्रेस वार्ता में पत्रकारों के समक्ष आयोग की बात रखी, अध्यक्ष ने स्वीकार किया कि:-

//पेशा कानून छत्तीसगढ़ में धरातल में नहीं //

अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने स्वीकार किया कि आदिवासी समाज के लिए बना पेसा कानून धरातल में नहीं है।
, “इसे गंभीरता से लागू किया जाएगा। प्रधानमंत्री से इस मामले में चर्चा चल रही है। आदिवासी समाज के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा और उनके साथ अन्याय नहीं होगा।
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी इसके क्रियान्वयन में कमियाँ हैं।
छत्तीसगढ़ में पेशा कानून को गंभीरता से लागू किया जाए। इस बात को लेकर मुख्यमंत्री से संवाद करेंगे। पत्र भी लिखेंगे और आदिवासियों के हितों के संवर्धन की बात भी करेंगे।

///आदिवासी पेसा कानून क्या है?///

प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण – पेसा अधिनियम आदिवासी समुदायों को उनके क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों, जैसे भूमि, जल और वन, के प्रबंधन और उपयोग पर नियंत्रण प्रदान करता है। इससे उनकी आजीविका की रक्षा करने और बाहरी संस्थाओं द्वारा शोषण को रोकने में मदद मिलती है।

///आदिवासी युवाओं के लिए संवाद कार्यक्रम//

अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष ने मंथन सभागृह में पत्रकारों से अपनी बात रखते हुए कहा कि आदिवासी युवाओं के लिए संवाद कार्यक्रम शीघ्र आयोजित की जाएगी जिससे प्रधानमंत्री आदिवासियों से रूबरू होकर संवाद करेंगे और आदिवासी युवाओं को आदिवासी संस्कृति के अनुसार जो वर्तमान समय में कहीं ना कहीं आज का युवा इससे भटक रहा है उन्हें अपने संस्कृति के ही अनुसार सामाजिक व धार्मिक परंपराओं पर चलने के लिए युवा संवाद कार्यक्रम के तहत तेरी किया जाएगा।

//विश्व आदिवासी दिवस पर राष्ट्रीय स्तर पर कोईआयोजन नहीं///

पत्रकारों के पूछे गए प्रश्न की आदिवासी विश्व दिवस पर राष्ट्रीय स्तर पर कोई भी आयोजन नहीं किया गया नहीं शासकीय अधिकारी इस आयोजन में शामिल हुए इस पर आयोग के अध्यक्ष ने पूछे हुये प्रश्नों को मोड़ते हुए कहा कि भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिन पर राष्ट्रीय स्तर पर वृहद कार्यक्रम किया जाएगा।

///आदिवासियों पर अत्याचार के मामलों में वृद्धि///

आदिवासियों पर अत्याचार के मामलों में वृद्धि को लेकर उन्होंने कहा, “2014 से 2025 तक देश में 47 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह पूरे देश की समस्या है। जितनी शिकायतें आती हैं, उन पर कार्रवाई की जाती है। पहले लोगों को पता नहीं था कि वे कहाँ जाएँ, अब जागरूकता बढ़ रही है।”

//समाज के प्रमुख ने रखी अपनी//

एक दिन पूर्व आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष के समक्ष आदिवासी जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठन प्रमुखो, समाज प्रमुखो, शासकीय कर्मचारी प्रमुखो ने सिंह आर्य के सामने सामजिक हालातों जानकारी दी , समाज प्रमुखो, संगठन प्रमुखो, पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ प्रदेश एवं स्थानीय क्षेत्रों मे व्याप्त समाजिक समस्याओं, ज्वलंत मुद्दों को उठाया ,अजजा आयोग राष्ट्रीय अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य को सामजिक हालातों जानकारी दी , कि= *नक्सलवाद समस्या, फर्जी मुड़भेड़, 32% आरक्षण, हसदेव मामला, पदोन्नति मे आरक्षण, पेशा क़ानून, मेशा क़ानून, वन अधिकार, 5 वीं अनुसूची, स्थानीय आरक्षण, आदिवासी जमीन खरीद फरोख्त, फर्जी जाति प्रमाण पत्र, 42 जनजातियों के आरक्षण की जटिलता, भूमि अधिग्रहण, विस्थापन, धर्मान्तरण, आदिवासी धर्म कोड, वन कटाई, आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार शोषण एवं संवैधानिक विधिक हक अधिकार* आदि परअजजा आयोग समस्त समस्याओं को दूर करने क्या पहल कर रही है यह अपने आप में अनबूछी पहली की तरह है?

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