सुधीर तिवारी बिलासपुर ।सुलभ इंटरनेशनल द्वारा आयोजित सोशियोलॉजी आफ सैनिटेशन विषय पर आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद में अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य अरुण दिवाकर नाथ बाजपेई ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि स्वच्छता एक बहुआयामी विषय है केवल समाजशास्त्र तक ही सीमित नहीं रखा जा सकता है। इसमें अर्थशास्त्र भी है, राजनीति शास्त्र भी है, दर्शन भी, विज्ञान और तकनीकी भी, अंतरराष्ट्रीय संबंध, कानून और व्यवस्था भी, व्यापार और प्रबंधन भी। इसलिए इसे किसी एक विषय में बांधना कठिन होगा। इसलिए किसी से उनका महत्व कम नहीं है। उन्होंने कहा कि बाहर की शुद्धता से कहीं अधिक मन और मनोविज्ञान की शुद्धता की आवश्यकता है जिसके सामाजिक समरसता स्थाई विकास में परिलक्षित होते हैं।भाषा के उपयोग को लेकर भी उन्होंने चिंता प्रकट की और कहा कि स्वच्छता के अभियान में देशज भाषाओं का भी अधिकाधिक उपयोग होना चाहिए । आधुनिक विज्ञान के युग में जिस प्रकार से तकनीकी का विस्तार हो रहा है, स्वच्छता के अभियान में आधुनिक तकनीकी का भी उपयोग होना चाहिए । विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर स्वच्छता से जुड़े हुए विषयों का अध्य्यन औऱ अनुसंधान करने से भी आने वाली पीढ़ी को बहुत लाभ प्राप्त होगा।आज के अवसर पर शुभारम्भ में पूर्व राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद, पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायालय न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर, सिक्किम के पूर्व राज्यपाल श्री गंगा प्रसाद ने भी अपने विचार प्रकट किए थे। भारतवर्ष के लगभग 25 विश्वविद्यालयों के कुलपति और समाजशास्त्र से जुड़े हुए शताधिक आचार्य परिसंवाद में 3 दिन तक मंथन करेंगे।

