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शिक्षक दिवस विशेष :- राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक अरविंद कुमार गुप्ता

बिलासपुर ब्यूरो (कमलेश लवहात्रे ) |  बतौली “जीवन में काम करने वाले तो बहोत है पर काम को अपना जीवन मानने वाले लोग बहोत कम है” आज हम आपको एक ऐसे ही शिक्षक अरविन्द कुमार गुप्ता शासकीय प्राथमिक शाला – जामझरिया मैनपाट

राज्यपाल पुरुस्कार प्राप्त वर्ष – 2019 की कहानी बताने जा रहे है जिनका पूरा कार्यकाल ही संघर्षों से भरा है, हम बात कर रहे हैं अरविन्द गुप्ता की। जब हमारी ये खास बातचीत अरविन्द गुप्ता से हुई तो उन्होंने बताया कि जब उनकी नियुक्ति छत्तीसगढ़ के शिमला कहे जाने वाले मैनपाट में पहाड़ की तराई पर बसे एक छोटे से गांव जामझरिया में हुई तो वो काफी उत्साहित थे, और कुछ कर दिखाने का जज्बा लिए शासकीय प्राथमिक शाला- जामझरिया में अपना पदभार ग्रहण किये। मगर बहोत जल्द ही उनका सामना यथार्थ के साथ हो गया। विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति न के बराबर थी,जो अरविन्द के लिए एक चुनौती बनकर सामने आया, जिसे अरविन्द ने इस चुनौती को सहर्ष स्वीकार किया। अगले ही दिन अरविन्द सुबह उठकर वहां गाँव में रहने वाले बच्चों के पलकों से मिलते हैं, जो मूलतः अतिपिछड़ी जनजाति मांझी मंझवार लोग थे। जो मेहनती तो थे मगर शिक्षा के महत्व की जानकारी बिल्कुल भी नहीं थी। उन्हें जागरूक करने का यह सिलसिला लगातार चलता रहा।अरविन्द रोज पलकों से मिलते और उन्हें शिक्षा के महत्व को समझाते और बच्चों को प्रतिदिन विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित करते। उनके लिए बच्चों को मुख्य धारा से जोड़ना ही कठिन चुनौती थी, यह कार्य निरंतर जारी रहा जब तक की बच्चों की उपस्थिति विद्यालय में शतप्रतिशत नही हो गई। शुरू शुरू में जो भी बच्चा पूरे सप्ताह विद्यालय आते उन्हें उपहार देना अरविन्द ने आरम्भ किये। यह आईडिया विद्यालय के लिए कारगर साबित हुई। धीरे धीरे बच्चों की उपस्थिति बढ़ती चली गयी और उपस्थिति शतप्रतिशत हो गई।बच्चों को उपहार स्वरूप खिलौने, कपड़े, जूते, मिठाइयां, बैट बॉल चॉकलेट इत्यादि सामग्री उपहार में दिए जाते थे। इसप्रकार विद्यालय में एक अच्छा वातावरण निर्मित हो गया। विद्यालय की दिशा औऱ दशा बदलने के लिए बच्चों की प्रवेश और उनकी नियमित उपस्थिति पर विशेष फोकस किया गया। सामान्य के अलावा घुमन्तु बच्चों के लिए विशेष अभियान चलाया गया।विद्यालय की दशा और दिशा बदलने की कोशिश में पैसे की कमी एक बड़ा मसला था इसके लिए विभाग से मिलने वाली बजट के साथ ही साथ अरविन्द ने अपने वेतन का कुछ हिस्सा शाला विकास में लगाने का निश्चय किया,फलस्वरूप विद्यालय अलग ही नजर आने लगा।और यही कारण है कि आज इस विद्यालय में अत्याधुनिक तकनीक से बच्चों को पढ़ाया जाता है, जिसकी चर्चा प्रदेश स्तर पर की जाती रही हैं। और एहि कारण है कि कोरोना के इस मुश्किल घड़ी में भी अरविन्द ने बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखा है, जिसे देखने के लिए मुख्य शिक्षा सचिव छत्तीसगढ़ शासन डॉ आलोक शुक्ला जी (IAS) ने दस सितम्बर 2020 को जामझरिया गाँव मे आकर अरविन्द के कार्यो की सराहना की और उन्हें स्पेशल उपहार देकर सम्मानित भी किये। 2005 से लेकर अभी तक का सफर विद्यालय के लिए अनेक उपलब्धियों भरा रहा है इसे विद्यालय का स्वर्णिम काल कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा।

विद्यालय की महत्वपूर्ण उपलब्धियां :-
(1) राज्य की सबसे बड़ी पुरस्कार राज्यपाल पुरस्कार 2019 से अरविन्द गुप्ता को सम्मानित किया गया। शुश्री अनुशुईया उईके राज्यपाल (छत्तीसगढ़ शासन) ने उन्हें यह सम्मान दी |
(2) राष्ट्रीय स्तर की ऐप्प “THE TEACHER APP” में विद्यालय की स्टोरी पब्लिश “अरविन्द गुप्ता के संघर्ष के नाम से प्रकाशित” शुश्री लावण्या कपूर (दिल्ली)ने लिखी है अरविन्द गुप्ता की संघर्ष की कहानी |
(3) 2014 में मिला विद्यालय को मुख्यमंत्री निर्मल शाला अवॉर्ड |
(4) 2016- 2017 और 2017-2018 में लगातार दो बार अरविन्द गुप्ता को मिला मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण पुरुस्कार |
(5) 2015 गणतंत्र दिवस समारोह में तत्कालीन ग्रीहराज्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन रामसेवक पैंकरा जी ने प्रशस्तिपत्र और मोमेंटो देकर अरविन्द गुप्ता को किया सम्मानित |
(6) छत्तीसगढ़ शासन के शिक्षा मंत्री डॉ प्रेमसाय सिंह ने SCERT रायपुर में अरविन्द गुप्ता को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित |

*इसके साथ ही साथ विद्यालय को विकास खंड स्तर पर और जिला स्तर पर अनेक उपलब्धि मिली हुई है |

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