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जीवामृत के प्रयोग से बढ़ाया खेतों में मित्र कीट की संख्या यूरिया,डीएपी के बिना धान का लिया बम्पर उत्पादन

नवागढ़/बेमेतरा संजय महिलांग : जीवों जीवनस्य जीवम के सूत्र पर चलकर नवागढ़ के युवा किसान किशोर राजपूत चलकर न सिर्फ धान का उत्पादन बढ़ाया है बल्कि रसायनिक उर्वरकों में लगने वाले खर्च भी कम किया है और ये सब प्राकृतिक खेती के मुख्य संजीवनी खाद जीवामृत के प्रयोग से सम्भव कर दिखाया है जैसा नाम वैसा ही काम जीवामृत जीवो के लिए अमृत हैं,हमारी खेती मे दो तरह के जीव होते है एक मित्र जीव दूसरे शत्रु जीव लेकिन आज खेती में बढते रासायनो के चलते, खेती में किसानो की मदद करने वाले मित्र जीवो की संख्या लगातार घट रही है या खत्म ही हो रही है, जिसके चलते खेती में शत्रु जीवो का आतंक बढ गया है, जीवामृत खेती करने की हमारी प्राचीनतम विधि का वो तरीका था, जिसके चलते ना सिर्फ मित्र जीवो को वापस लाया जा सकता है ब्लकि किसानो के रसायन का खर्चा और देश के स्वास्थ्य को भी बचाया जा सकता है । धान का एक एकड़ 16 क्युटल उत्पादन हुआ है।

युवा किसान किशोर राजपूत ने बताया कि आज हमे जीवामृत से खेती करने की बहुत ही आवश्यकता है क्योंकि हरितक्रांति के बाद भारतीय खेती मे जिस प्रकार रसायनिक उर्वरको का आंख बंद कर के बड़ी भारी मात्रा मे प्रयोग हो रहा है, उसके कारण से हमारी भूमि की संरचना और जलवायु को ही बदल कर रख दिया है। आज बहुत ही तेजी से खेती योग्य भूमि बंजर भूमि में बदलती जा रही है और किसानो का लाखों करोड़ रुपया रासायनिक उर्वरकों पर खर्च हो रहा है। खेतो मे लगातार रासायनिक उर्वको के प्रयोग से चलते नि सिर्फ फसलो की पैदावार पर ब्लकि हमारे स्वाथ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। चारो तरफ गंभीर बीमारियों के रोगी बढ रहे है,इसलिए स्वास्थ पर कमाई से ज्यादा खर्चा हो रहा है।

जीवामृत बनाने के लिए सामान और निर्माण करने की विधि

【1】देशी गाय का 10 किलो गोबर (देशी बैल का भी ले सकते हैं)
【2】 10 लीटर गौमूत्र (देशी बैल का भी ले सकते हैं)
【3】 पुराना सड़ा हुआ गुड़ 1 किलो (नया गुड़ भी ले सकते है।
【4】किसी भी प्रकार की दाल का 1 किलो आटा (मूंग, उर्द, अरहर, चना आदि का आटा)
【5】बरगद या पीपल के पेड़ के नीचे की मिट्टी 1 किलो इसे सजीव मिट्टी भी कहते है।अगर पीपल या बरगद के पेड़ के नीचे की मिट्टी न मिले तो ऐसे खेत की मिट्टी प्रयोग की जा सकती है जिसमें कीटनाशक न डाले गए हों।
【6】200 लीटर पानी

जीवामृत निर्माण विधि

किशोर राजपूत ने बताया कि सबसे पहले 10 किलो देशी गाय का गोबर और 10 लीटर देशी गाय या बैल का मूत्र को अच्छी तरह मिला ले,उसमे देशी गुड,दाल का आटा और मिट्टी को भी ठीक से मिला ले, फिर 200 लीटर पानी में सबको सुई की दिशा मे डंडे की सहायता से सुबह शाम घोले और इस खाद को 7 दिन बाद खेतों में छिड़काव करे।

उन्होंने कहा वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक बताते है कि देशी गाय के 1 ग्राम गोबर में लगभग 500 करोड़ जीवाणु होते हैं। जब हम जीवामृत बनाने के लिए 200 लीटर पानी में 10 किलो गोबर डालते हैं तो लगभग 50 लाख करोड़ जीवाणु इस पानी मे डालते हैं जीवामृत बनते समय हर 20 मिनट में उनकी संख्या दोगुनी हो जाती है। जीवामृत जब हम 7 दिन तक किण्वन के लिए रखते हैं तो उनकी संख्या अरबों-खरबों हो जाती है। जब हम जीवामृत भूमि में पानी के साथ डालते हैं, तब भूमि में ये सूक्ष्म जीव अपने कार्य में लग जाते हैं तथा पौधों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराते हैं।

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