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बारामूला में पुलिस के ADP पर आतंकियों की फायरिंग, एक हाइब्रिड आतंकी ढेर, मजदूर की हत्या में था शामिल

जम्मू कश्मीर : बारामूला के चेरदारी में सेना और पुलिस के एडीपी पर आतंकियों ने फायरिंग की. अलर्ट दलों ने जवाबी कार्रवाई की और 1 आतंकवादी मारा गया. मामले की जांच की जा रही है. बता दें आतंकवादियों के पास से 1 पिस्टल, 1 लोडेड मैगजीन और 1 पाक ग्रेनेड बरामद किया गया है. कश्मीर जोन पुलिस ने इसकी जानकारी दी है.आईजीपी कश्मीर विजय कुमार ने बताया, मारा गया आतंकवादी हाइब्रिड टाइप का है, जिसकी पहचान कुलगाम जिले के जावेद आह वानी के रूप में हुई है और उसने वानपोह में बिहार के 2 मजदूरों की हत्या में आतंकवादी गुलजार (जो 20 अक्टूबर को मारा गया था) की मदद की है. वह बारामूला में एक दुकानदार को निशाना बनाने के मिशन पर था.

जम्मू कश्मीर के 7 जिलों में 17 स्थानों पर तलाशी ली थी
इससे पहले, एनआईए ने बुधवार को जमात-ए-इस्लामी के आतंकवाद वित्तपोषण के मामले में जम्मू कश्मीर के 7 जिलों में 17 स्थानों पर तलाशी ली. एजेंसी के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी. एनआईए के एक प्रवक्ता ने कहा कि कश्मीर के अनंतनाग, कुलगाम, गांदेरबल, बांदीपोरा और बडगाम जिलों तथा जम्मू के किश्तवाड़ और जम्मू जिलों में छापे मारे गये.

सूत्रों के मुताबिक, ‘आज की तलाशी में जमात-ए-इस्लामी के पदाधिकारियों तथा सदस्यों के परिसर शामिल हैं और संदिग्धों के परिसरों से अनेक अभियोजन योग्य दस्तावेज तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किये गये.’ इससे पहले एनआईए ने आठ और नौ अगस्त को छापों के दौरान कश्मीर के 10 जिलों तथा जम्मू के चार जिलों में 61 स्थानों पर तलाशी ली थी.

केंद्र ने फरवरी 2019 में जमात पर आतंकवाद रोधी कानूनों के तहत इस आधार पर पांच साल का प्रतिबंध लगाया था कि यह आतंकवादी संगठनों के साथ करीबी संपर्क में था और उसके द्वारा पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य में अलगाववादी आंदोलन को बढ़ने की आशंका थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा पर उच्चस्तरीय बैठक के बाद गृह मंत्रालय ने विधिविरुद्ध क्रियाकलाप रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत समूह पर प्रतिबंध लगाने की अधिसूचना जारी की थी.वहीं 17 अक्टूबर को कुलगाम जिले में आतंकवादियों ने बिहार के दो मजदूरों को मार गिराया था.इस घटना के बाद इस महीने जम्मू-कश्मीर में लक्षित हमलों में मारे गए नागरिकों की संख्या 11 हो गई. यह हमला 24 घंटे से भी कम समय में गैर-स्थानीय मजदूरों पर तीसरा हमला था.

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