रायपुर वॉच

क्रेडिट कार्ड बनाकर लोन का ‘खेल’ : 2 लाख लोन में 1 लाख खुद रख लेते थे, 5 आरोपी गिरफ्तार

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रायपुर: क्रेडिट कार्ड बनाकर लोन दिलाने के खेल का भंडाफोड़ हुआ है. मामले में पांच आरोपियों की गिरफ़्तारी हुई है. निजी कंपनियों के कर्मचारियों ने बड़ा गोलमाल किया है. क्रेडिट कार्ड बनाकर लोन दिलाने का झांसा देकर आरोपी ग्राहक ढूंढते थे. उसके बाद 2 लाख लोन पास कराकर एक लाख लोन आरोपी लोग ही आहरित कर लेते थे. एक लाख रुपए ग्राहक को थमा देते थे. तेलीबांधा थाना पुलिस मामले की विस्तृत विवेचना में जुट चुकी है.

रायपुर शहर में कुछ शातिरों के गैंग ने 45 परिवारों को ठगा है। लोअर मिडिल क्लास के इन परिवारों ने कोविड की वजह से उपजी आर्थिक परेशानियों से राहत की चाहत में लोन के लिए आवेदन किया। मगर शातिरों के जाल में फंस गए। बदमाशों ने लोगों के नाम पर लोन की रकम खुद रखी। किसी के नाम पर क्रेडिट कार्ड बनवाकर खुद मजे करते रहे और अब आम लोग किश्तों के बोझ और बैंक की तरफ से आ रहे धमकी भरे फोन कॉल से परेशान हैं।

तेलीबांधा इलाके में रहने वाले मोहन राव नाम के शख्स ने जब थाने जाकर शिकायत की तो पता चला कि उसकी तरह 45 लोग और हैं जिनके साथ इसी तरह करीब 3 करोड़ की धोखाधड़ी हुई है। मोहन राव ने ठगी करने वालों की जानकारी पुलिस को दी है। जांच टीम अब फरार ठगों की तलाश कर रही है।

मोहन राव ने अपनी शिकायत में बताया कि कोविड की वजह से बीते दो सालों में उसके परिवार की माली हालत बिगड़ गई थी। शक्ति नगर की बस्ती में रहने वाले मोहन को उसके पड़ोसी रजनी बाई और सुनील साहू ने एक लोन एजेंसी के बारे में बताया। जिसके बाद मोहन राव राजेंद्र नगर स्थित हेल्पिंग फॉर एवर नाम की संस्था के दफ्तर पहुंचा। यही एजेंसी लोन देने का काम करती है। इसके तीन डायरेक्टर निखिल कोसले, शिव साहू और शैलेन्द्र मिश्रा ने 3 लाख रुपए का लोन दिलाने का वादा किया। इनके दफ्तर में मौजूद एक्सीस बैंक का एजेंट नबील खान और जगमोहन ने मोहन से सारे दस्तावेज लिए। निखिल ने बताया कि पैसे एक्सीस बैंक से मिलेंगे। मोहन ने बातों में आकर सभी प्रक्रिया को पूरा किया।

फिर ठगों ने रख दी शर्त
निखिल कोसले, शिव साहू और शैलेन्द्र मिश्रा ने मोहन राव के सामने शर्त रखी। कहा गया कि लोन की रकम का 25 प्रतिशत कमिशन और 25 हजार रुपए प्रोसेसिंग के देने होंगे। मोहन ने किश्तों के बारे में पूछा तो तीनों ने कहा कि जो लोन के रुपए मिलेंगे, उसमें से कुछ रुपए निखिल और उसके साथी किसी दूसरी कंपनी में इंवेस्ट करेंगे। फिर जो प्रॉफिट होगा उससे किश्त जमा हो जाएगी, मोहन को रुपए नहीं देने पड़ेंगे। पैसे मिलने पर तीनों शातिरों ने मोहन को 1 लाख रुपए दिए और चलता कर दिया।

कुछ दिनों बाद मोहन को पता चला कि उसके नाम पर क्रेडिट कार्ड जारी हुआ है, इसका बिल पे नहीं किया गया है। लोन की किश्तें भी जमा नहीं की गईं। वो फिर से निखिल और उसके साथियों के पास गया तो आरोपियों ने उसे टालकर भगा दिया। मोहन ने अपने मोहल्ले में लोगों से बात की तो पता चला कि इसी तरह से 45 से अधिक परिवारों से रकम का लेन देन कर आरोपियों ने 3 करोड़ से अधिक की ठगी की है। अब शातिर फरार हैं, इसलिए मोहन ने FIR दर्ज करवाकर पुलिस से इस मामले में मदद मांगी है।

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