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पर्युषण पर्व पर 14 वर्षीय श्रद्धा तातेड़ और शिल्पा तातेड़ ने 9 दिनों की तपस्या पूरी की

प्रकाश नाग/केशकाल : जैन धर्मावलंबियों का आठ दिनों तक चलने वाला पर्युषण पर्व रविवार को सामूहिक क्षमा याचना के साथ संपन्न हो गया। पर्युषण के सातवें दिन शनिवार को संबत्सरी के रूप में मनाया गया। जैन संस्कृति के महापर्व परवाधिराज पर्युषण पर्व के उपलक्ष में केशकाल जैन श्वेतांबर श्री संघ में उपासना एवं आराधना हर्षोल्लास पूर्वक एवं भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। जिसमें बड़ी संख्या में दादा गुरुदेव के भक्त सम्मिलित हुए। पर्यूषण पर्व के उपलक्ष में कल्प सूत्र का वाचन संपन्न होने पर एवं पर्यूषण पर्व के अंतिम दिवस सांसारिक पर्व के रूप में सभी भक्तगण प्रतिक्रमण करके दुनिया के 84 लाख योनि के समस्त जीव-जंतुओं से छमा याचना की गई।
बता दें कि क्षमा पर्व के दिवस का जैन संस्कृति में बहुत ही महत्व है इसके अंतर्गत अनेक नगर के विभिन्न भक्तों ने तपस्या भी की है। जिसमें से केशकाल जैन समाज के वरिष्ठ व भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष कानमल जैन की भतीजी कुमारी शिल्पा तातेड़ पिता अमृत तातेड़ मां अनिता तातेड़ ने 11 दिन व पोती कुमारी मौली तातेड़ पिता राकेश तातेड़ मां श्रद्धा तातेड़ उम्र 14 वर्ष ने 9 दिनों की तपस्या पूरी की है। यह तपस्या बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस तपस्या में निराहार रहकर के तप करना पड़ता है, और धर्म आराधना करना पड़ता है। आज तपस्या का अंतिम दिवस पर दोनो ही युवतियों के अभिनंदन में उनके सम्मान में प्रभात फेरी निकाली गई और उनका अभिनंदन किया गया। साथ ही बहुत ही भक्तिमय वातावरण में कार्यक्रम संपन्न हुई धर्मा जैन धर्मावलंबियों ने इनका इस अवसर पर अभिनंदन किया और परिवारजनों ने भी इसमें बहुत ही हर्षोल्लास पूर्वक इसे उत्सव के रूप में मनाया।
इस दौरान समाज के वरिष्ठ कानमल जैन ने इस दिन की महिमा को बताते हुए कहा कि आज मूल रूप से भगवान महावीर के संपूर्ण जीवन चरित्र की व्याख्या की जाती है। समाज को आत्मा की शुद्धि करने की प्रेरणा दी जाती है। शाम को प्रतिक्रमण करने के बाद संसार के सभी प्राणियों के साथ क्षमा याचना की जाती है। उपासकों ने बताया कि जिस किसी के साथ हमारा मनमुटाव हो तो उसे निर्विवाद मिटाने के लिए आपस में क्षमा याचना करके पुनः मैत्रीभाव के द्वारा नए वर्ष की शुरुआत की जाती है। बताया कि जब हम क्रोध में होते हैं तो हमारा चेहरा लाल हो जाता है लेकिन जब हम किसी से क्षमा मांगते हैं तो हमारे चेहरे पर हंसी और खुशी के भाव आ जाते हैं जो हमें अहंकार से दूर रह कर झुकने की कला सिखाती है। इसलिए क्षमावाणी पर्व पर क्षमा का अपने जीवन में उतारना ही सच्ची मानवता है।

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