- घर पर ही बच्चों और बड़ों ने देश में अमन और शांति के लिए मांगी दुआ
अक्कू रिजवी/कांकेर : सारे देश में संभवतः प्रथम बार अक्षय तृतीया (अक्ती ) तथा ईद उल फितर एक साथ एक ही दिन पड़ रही थीं। यह एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक अवसर था जिसे राष्ट्रीय एकता पर्व की तरह मनाया जा सकता था किंतु कोरोना लॉकडाउन के ग्रहण के कारण ऐसा नहीं हो पाया । जिसका सारे देश को अफ़सोस रहेगा। कांकेर शहर में भी लोगों को ना चाहते हुए भी अपने अपने घरों में ही सीमित रूप से अपने अपने त्यौहार मनाने पड़े। ब्राह्मण समाज ने घरों में ही पूजा पाठ करते हुए भगवान परशुराम की जयंती का महान उत्सव मनाया। शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया को विवाह निश्चित होने पर मुहूर्त के समय का विचार नहीं करना होता है क्योंकि अक्षय तृतीया अपने आप में शुभ मुहूर्त होती है लेकिन इस अवसर का लाभ देश में शायद ही कोई परिवार उठा पाया होगा । क्योंकि शादी समारोह पर प्रतिबंध लगे हुए हैं। वह भी इतने अधिक सख्त हैं कि लोग फिलहाल शादियों को महीनों टालना उचित समझ रहे हैं। बच्चों की गुड्डे गुड़ियों की शादियां भी बहुत कम हुई । क्योंकि उन्हें भी घरों के आंगन तक सीमित रहना पड़ गया । मुस्लिम समाज में ईद का त्यौहार घरों की चारदीवारी के अंदर मनाया गया। जिस में सारी दुनिया में शांति होने तथा महामारी कोरोना की समाप्ति हेतु दुआएं मांगी गई।

