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हमर गाँव हमर जिम्मेदारी कार्यक्रम के तहत सरपंचो को दिया गया एक दिवसीय प्रशिक्षण

यामिनी चंद्राकर/ छूरा : आदिवासी विकासखण्ड छूरा के जनपद पंचायत सभागार में आज  जनपद पंचायत क्षेत्र के 25 सरपंचो को  हमर गाँव हमर जिम्मेदारी कार्यक्रम के तहत एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। ब्लाक के 74 सरपंचो को प्रशिक्षण देने के लिए तीन चरणों मे बाटा गया है जिसमे पहली चरण में 25 सरपंचो को आज ब्लाक के सभी शाखा प्रमुखों द्वारा शासन द्वारा संचालित समस्त योजनाओं के सम्बंध में विस्तारपूर्वक बताया गया जिसमे सविधान की पंचायत द्वारा अपेक्षा,73 वा सविधान संशोधन की विशेषताए, छतीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम,अनुसूचित क्षेत्रो में पंचायतो के लिए विशिष्ट, त्रिस्तरीय पंचायत की सरंचना, ग्राम पंचायत के कृत्य,ग्राम पंचायत सचिव की शक्तियाँ तथा कृत्य,सरपंच तथा उपसरपंच की शक्तियां तथा कृत्य, ग्राम सभा, पंचायतो की बैठक तथा कामकाज संचालन, लेखा एवं बजट,ग्राम पंचायत में आय के स्रोत एवं कर या फीस अधिरोपित करने की प्रक्रिया,कार्यलय एवं प्रबंधन,पंचायत एवं पदाधिरियो पर नियंत्रण,लोक सेवा गारंटी/राशन कार्ड,स्थायी समितिया,लेखा बजट एवं अंकेक्षण, सामाजिक सहायता कार्यक्रम,ग्राम पंचायत विकास योजना जीपीडीपी,एनआरएलएम(बिहान कार्यक्रम),राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना,पंचायत उपबन्ध(अनुसूचित क्षेत्रों का विस्तार) अधिनियम 1996 पैसा,सूचना का अधिकार अधिनियम 2005, प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना,जन्म एवं मृत्यु पंजीयन एवं वन अधिकार ,कमार भुंजिया परियोजना,निर्माम कार्य एवं अन्य विषयों पर जनपद पंचायत के अधिकारी कार्तिक राम यादव, कयाराम यादव,हेमालाल कंवर, सुभाष  चन्द्र निर्मलकर,रामकुमार कुंजाम, आशा बरिहा,मनेंद्र नागेश,हर्षा वर्मा, भगत सिंग ध्रुव,एम पी शर्मा,एल पी तिवारी,एस डी इफ्राईम, द्वारा पंचायत में होने वाले और सरपंचो के दायित्व के सम्बंध में विस्तारपूर्वक बताया गया। इस सम्बंध में जनपद पंचायत के मुख्यकार्यपालन अधिकारी रुचि शर्मा ने बताया कि पंचायतो की भूमिका अब इतनी सीमित नही है उन्हें जरूरी अधिकार और धन दोनों ही चीजे मिल रही है जिसका असर अब जमीनी स्तर पर दिखता है जब कोई गाँव मे आये और अच्छी सड़के ,पक्के मकान, ग्राम की स्वछता, नालियों और गलियों की सफाई की तारीफ करे तब समझ लीजिए आप एक ऐसे जागरूक ग्राम के है जहां पंचायत नाम की नही यहां धरातल पर भी कार्य हो रहा है भारत को गावों का देश कहा जाता क्योंकि आज भी देश की 70 प्रतिशत आबादी गाँव मे ही निवास करती है और आज देशभर में लगभग ढाई लाख ग्राम पंचायते निरन्तर भारत के विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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