- रिन्यूअल के टाइम आंख बंद करके आबकारी अधिकारी ने कर दिया रिन्यूअल फाइल में साइन…!!
- आबकारी विभाग में कमीशन का चल रहा है ज़बरदस्त खेल , राजस्व को लग रहा है चुना…!!
अक्कू रिजवी/ कांकेर : ज़िला उत्तर बस्तर कांकेर के शहर भानुप्रतापपुर में वैसे तो बिना अनुमति कहीं भी मकान दुकान बना लेने का खेल बहुत पुराना है किंतु आम जनता को यह जानकर भारी आश्चर्य हुआ है कि सरकार ऐसे अनेक अवैध निर्माणों की छानबीन करना तो दूर उसे किराए पर लेकर वहां दारू दुकान भी चला रही है । जब एक बड़ा जिम्मेदार अधिकारी ही ऐसा करे , तो फिर कहना ही क्या ? आम जनता उनकी फरियाद किससे करेगी ? विगत दिनों सूचना के अधिकार 2005 से यह बड़ा खुलासा हुआ है कि ज़िले के आबकारी अधिकारी ने न केवल भानूप्रतापपुर शहर से संलग्न ग्राम पंचायत नारायणपुर के एक खेती प्लाट को , जिसका आज की तारीख तक भी आबादी प्लाट में डायवर्सन नहीं हुआ है , सरकारी दारू दुकान हेतु किराए पर ले लिया है । यहां तक कि इस साल उसके किराएनामे अर्थात एग्रीमेंट का नवीकरण भी कर दिया है। इस नवीनीकरण को अभी तत्कालीन आबकारी अधिकारी मरकाम साहब ने हीं किया है , वह भी आंख बंद करके उल्लेखनीय है कि कोई भी दुकान या मकान सरकारी काम से किराए पर लेने से पूर्व बाकायदा अनेक कागजात देखे जाते हैं कि यह ज़मीन या मकान किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर तो नहीं है……? एग्रीमेंट सही आदमी से किया जाना अनिवार्य है । लेकिन यहां एक ऐसी दुकान का मामला फंस रहा है , जिसका खेती प्लाट है , आबादी प्लाट में आज तक डायवर्सन हुआ ही नहीं है। इस प्रकार उसका सरकारी काम से किराए पर लेना और देना दोनों ही गैर कानूनी कार्य हैं । स्पष्ट है कि ज़िला आबकारी साहब ने कागजात पर बिना देखे तो हस्ताक्षर नहीं किए होंगे लेकिन कागजात में इतनी बड़ी पोल को उन्होंने दबा दिया है और न केवल उस अवैध दुकान का किराया शासन से दिलवा रहे हैं बल्कि शासन तथा जनता के खजाने को भी चूना लगा रहे हैं । इस प्रकार भ्रष्टाचार से दुकान मालिक को दिलाई गई सारी राशि आबकारी साहब से वसूल की जानी चाहिए बल्कि कर्तव्य पालन में लापरवाही तथा नियमों के उल्लंघन पर सजा और जुर्माना दोनों होने चाहिए। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि मई 2020 में ज़िला आबकारी अधिकारी को ग्राम भानुप्रतापपुर के मदिरा दुकानों के नवीकरण की फाइल दिखाई गई तो उन्होंने छत्तीसगढ़ भूमि डायवर्सन नियम 1962 की धारा 172 छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता में दिए गए कानूनी प्रावधानों का पालन किए बिना नवीनीकरण कर दिया , जिसके कारण छत्तीसगढ़ शासन को राजस्व की एक बहुत बड़ी रकम मिलने से वंचित होना पड़ा । वह भी एक लापरवाह कमीशन खोर अधिकारी की वजह से । यह कानून सारे भारत में अच्छी तरह जाना जाता है कि यदि खेत की ज़मीन को बिना आबादी प्लाट में डायवर्सन किए व्यावसायिक उपयोग किया जाता है तो इसके लिए भारी जुर्माने का प्रावधान है। आगे देखना दिलचस्प होगा कि कानून से खेल करने वाले और मनमानी तरीके से भ्रष्टाचार करने वाले आबकारी साहब के ख़िलाफ़ 36 गढ़ राज्य की वर्तमान सरकार आख़िर क्या कदम उठाती है……?

