कोलंबो। घनघोर आर्थिक और ऊर्जा संकट से जूझ रहे श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिन्दा राजपक्षे ने सोमवार को आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राजपक्षे ने पहले अपना पद छोड़ने से इनकार कर दिया था। श्रीलंका के स्थानीय मीडिया ने यह खबर दी है।
देश की विकट स्थिति के लिए राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे और उनके भाई महिन्दा राजपक्षे को जिम्मेदार ठहराते हुए हजारों नागरिकों के सड़कों पर उतरने के बाद आज प्रधानमंत्री ने अपना पद छोड़ा।देश के हजारों लोग राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों के खिलाफ सड़कों पर उतर आये हैं।
माना जा रहा है कि विपक्ष की अंतरिम सरकार बनाने की मांग के आगे झुकते हुए राजपक्षे ने यह कदम उठाया है।
एक पुलिस प्रवक्ता ने स्थानीय मीडिया के हवाले से कहा कि अगले नोटिस तक तत्काल प्रभाव से पूरे श्रीलंका में कर्फ्यू लगा दिया गया है. कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाये रखने में सहायता के लिए सैन्य दल को विरोध स्थल पर तैनात किया गया है. शुक्रवार को एक विशेष कैबिनेट बैठक में राष्ट्रपति ने शुक्रवार मध्यरात्रि से इमरजेंसी की घोषणा कर दी थी. यह दूसरी बार है जब श्रीलंका में लगभग एक महीने की अवधि में आपातकाल घोषित किया गया।
साल 1948 में ब्रिटेन से आजादी मिलने के बाद श्रीलंका अब तक के सबसे गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है. यह संकट मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा की कमी के कारण पैदा हुआ जिसका अर्थ है कि देश मुख्य खाद्य पदार्थों और ईंधन के आयात के लिए भुगतान नहीं कर पा रहा है. नौ अप्रैल से पूरे श्रीलंका में हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर हैं, क्योंकि सरकार के पास आयात के लिए धनराशि खत्म हो गई है. आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं।
Sri Lankan Prime Minister Mahinda Rajapaksa resigns: Local media#SriLanka
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— ANI (@ANI) May 9, 2022

