रायपुर वॉच

देशभर के एम्स में रायपुर सबसे आगे-सबसे अधिक कोविड रोगी, वार्ड में कोई मृत्यु नहीं, आईसीयू में सबसे कम मृत्युदर

Share this
  • देशभर के केंद्रीय स्वास्थ्य संस्थानों के तुलनात्मक अध्ययन में एम्स रायपुर की प्रतिबद्धता दिखी
  • केंद्रीय संस्थानों में दूसरे स्थान पर सबसे ज्यादा कोविड-19 रोगियों को उपचार प्रदान किया
  • कोविड-19 से न थके हैं और न हारे हैं, संघर्ष अभी जारी रहेगा-प्रो. नागरकर

रायपुर : देशभर के प्रमुख केंद्रीय स्वास्थ्य संस्थानों में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, रायपुर ने अब तक दूसरे स्थान पर सर्वाधिक कोविड-19 रोगियों का इलाज किया है। यह एनसीआई, झज्जर (हरियाणा) के बाद दूसरे स्थान पर है जबकि देश के नए एम्स में यह पहले स्थान पर है। इसके साथ ही एम्स के कोविड-19 वार्ड में एक भी मृत्यु नहीं हुई है और आईसीयू में हुई मृत्यु दर भी सबसे कम रही है। यह भी एम्स रायपुर के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि बन गई है।

देशभर के केंद्रीय स्वास्थ्य संस्थानों के तुलनात्मक अध्ययन से कई तथ्य स्पष्ट होते हैं। एम्स रायपुर ने 16 सितंबर तक 3305 कोविड-19 रोगियों का इलाज कर दिया है या उन्हें उपचार प्रदान किया जा रहा है। इसी अवधि में एम्स दिल्ली ने 2310 और झज्जर स्थित एनसीआई ने 4155 कोविड-19 रोगियों का उपचार किया है। यह दोनों संस्थान दिल्ली और एनसीआर में स्थित हैं और संसाधनों के लिहाज से काफी समृद्ध हैं। देश के सबसे पुराने चिकित्सा संस्थानों में से एक पीजीआई, चंडीगढ़ ने अब तक 1006 और जेआईपीएमईआर, पुडूचेरी ने 2351 कोविड-19 पॉजीटिव रोगियों का उपचार किया है। अगर रायपुर के साथ बनाए गए एम्स जोधपुर, पटना या ऋषिकेश की बात करें तो इन तीनों से लगभग डेढ़ गुना ज्यादा तक रोगियों का उपचार अब तक एम्स रायपुर में हो चुका है।

निदेशक प्रो. (डॉ.) नितिन एम. नागरकर ने कहा है कि यह सभी आंकड़े एम्स रायपुर की प्रतिबद्धता और समर्पण को दर्शाने के लिए काफी हैं। सभी चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, पैरा मेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारी छह माह से दिन-रात बिना अवकाश के निरंतर कोविड-19 रोगियों की सेवा में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 वार्ड में अब तक एक भी मृत्यु न होना दर्शाता है कि चिकित्सक और नर्सिंग स्टॉफ रोगी की स्थिति बिगड़ते ही उसे आईसीयू या एचडीयू में एडमिट कर लाइफ स्पोर्ट सिस्टम प्रदान करते हैं। इससे गंभीर रोगियों की जान बचाने की अंतिम कोशिश भी कह सकते हैं। आईसीयू में रोगियों की संख्या के हिसाब से मृत्यु दर भी अन्य एम्स के मुकाबले काफी कम है। यह आईसीयू में अत्याधुनिक चिकित्सा सेवा और चिकित्सीय सहायता की वजह से संभव हो पाया है। उन्होंने कहा है कि पिछले छह माह के दौरान वैश्विक महामारी के खिलाफ संघर्ष में न तो एम्स थका है और न हारा है। वैश्विक महामारी के खत्म होने तक इसी प्रकार चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाती रहेंगी।

एम्स के आईसीयू वार्ड में वर्तमान में 70 बैड उपलब्ध हैं जिनमें 40 कोविड-19 वार्ड में जबकि 15-15 इमरजेंसी और पल्मोनरी मेडिसिन विभाग में हैं। इन दोनों विभागों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में आने वाले रोगी कोविड-19 पॉजीटिव निकल रहे हैं।

 

Share this

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *