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ग्रामीण इलाको में स्वच्छ पेजयल सुविधा की खुल रही पोल, ग्रामीण लाल पानी पीने को मजबूर

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नगरी : सरकार ग्रामीण इलाको में स्वच्छ पेजयल सुविधा उपलब्ध कराने के तमाम दावे करती है। लेकिन सरकार के इन्ही दावों की हकीकत क्या है, इसका अंदाजा वनांचल इलाके के गडड़ोंगरी के आश्रित ग्राम डोहला के हालात से लगाया जा सकता है। गांव में तीन-तीन हेण्डपंप होने के बावजूद आज भी यहां के ग्रामीण लाल पानी पीने को मजबूर है या फिर निजी बोर से प्यास बुझा रहे है। दरअसल धमतरी जिले के ग्रामीण अंचलों के अधिकांश गांवों में स्वच्छ पेयजल नही मिलने की शिकायतें आम बात है जबकि शासन प्रशासन हर साल स्वच्छ पानी के नाम पर लाखों रूपए का मसौदा तैयार करता है। लेकिन बावजूद इसके ग्रामीणों की बदकिस्मती है कि वे आज भी लाल पानी को पीने के लिए मजबूर है।
ऐसे में शासन की सारी योजनाएं महज कागजों में ही सिमटती नजर आ रही है.जिसकी एक बानगी धमतरी जिले के आदिवासी बाहुल वाले इलाके के ग्राम डोहला में देखने को मिल रही है जहां आदिवासी परिवारों को षुध्द पेयजल के लिए दर दर भटकने को मजबूर होना पड़ता है,वनांचल इलाके के ग्राम डोहला में करीब 500 लोग रहते है इनमें ज्यादातर आदिवासी परिवार निवास करते है, और अपनी तमाम जरुरतो के लिए जंगल पर निर्भर है.ऐसा नही है कि शासन इनके बीच नही पहुंचता हो शासन प्रशासन द्वारा यहां कई योजनाएं भी चलाई जाती है।लेकिन इन सब के बावजूद आदिवासियों को रोजमर्रा की जरुरतो के दो चार होना पड़ रहा है।
गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए तकरीबन 3 हैण्डपम्प तो है लेकिन इन हैण्डपम्पों में लाल पानी निकल रहा है.नतीजा आदिवासी परिवारो को पानी के लिए दर दर भटकना पड़ता है।हालात ये कि आदिवासियों को अब हैण्डपम्प से निकलने वाले लाल पानी पीने को मजबूर है या फिर उन्हें साफ पानी के लिए दूसरों पर आश्रित रहना पड़ता है
दुषित पानी पीने को मजबुर ग्रामीणों
ग्रामीणों की माने तो गांव के सभी हैण्डपंप खराब है और उनमें लाल पानी निकलता है जिस वजह से अब उन्हे किसानों के खेतों में लगे बोर पर आश्रित होना पड़ रहा है.ग्रामीणों का यह भी कहना है कि ये समस्या बीते कई महीनों से बनी हुई है जिसको लेकर कलेक्टर और विधायक को भी जानकारी दी जा चुकी है। लेकिन उन्हे सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नही मिला.ऐसा नही कि पीएचई महकमा मामले से अनजान है.पूरे हालात से वाकिफ होने के बाद भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
बहरहाल इन परिवारो को कब तक प्रशासन पेयजल की समस्या से निजात दिलाएंगे.ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन ग्रामीणों के पेयजल समस्या को देखते हुए अन्दाजा लगाया जा सकता है। कि प्रशासनिक दावे सिर्फ कागजो में ही सिमट कर रह गई है.

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