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गोठानों में किया जा रहा चारागाह का विकास, गोठानों के मवेशियों को मिलेगा ताजा और पौष्टिक चारा

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बालकृष्ण मिश्रा/सुकमा : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा किसानों को आवारा पशुओं से राहत दिलाने और पशुधनों के ठौर-ठिकानों के लिए बनाए गए गौठानों में अब पशुओं को हरा चारा भी उपलब्ध होने लगा है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में गौठानों का भी निर्माण किया गया है। इन गोठानों के मवेशिओं को ताजी और हरी पौष्टिक चारा उपलब्ध कराने के लिए चारागाह बनाने की कवायद शुरू की गई थी। सुकमा जिले में पशुओं को पौष्टिकता से भरपूर हरा चारा उपलब्ध कराने के लिए 80 गोठानों में नेपियर घास रोपे गए थे, जो अब चारागाहों में लहलहाने लगे हैं। चारागाहों में लगाये गए नेपियर घास शीघ्र जड़ पकड़ कर तेजी से विकसित होने लगे हैैं, जिससे चारागाह में हरियाली छाई है। 80 गौठानों में लगभग 241.50 एकड के क्षेत्र में चारागाह का निर्माण कर नेपियर घास लगाया गया है। पशुओं के लिए हरा चारा की उपलब्धता बनाए रखने एवं गौठानों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से चारागाहों में नेपियर घास लगाई गई है। आने वाले समय में नेपियर घास एवं नेपियर गांठ विक्रय कर गौठान समितियाँ, स्व-सहायता समूह को आर्थिक लाभ प्राप्त होगी। पशु चिकित्सा सेवाएं के उपसंचालक डॉ. एस. जहीरूद्दीन ने बताया की नेपियर घास बहुत तेजी से बढ़ता है पशुओं के लिए यह पौष्टिक चारा है इस घास को सालभर में 6 से 8 बार कटाई करके हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है। पोषक तत्वों से भरपूर पशुओं के चारे के लिए नेपियार घास बहुत ही उपयुक्त माना जाता है। हाईब्रिड नेपियर घास में कूड प्रोटीन 8-10 फीसदी, क्रुड रेशा 30 फीसदी और कैल्शियम 0.5 फीसदी मौजूद होता है। इसके अलावा 16-20 फीसदी शुष्क पदार्थ 60 फीसदी पाचन क्षमता और 3 फीसदी औक्सालेट वाला यह चारा है।

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