रायपुर : रक्षाबंधन त्योहार के मद्देनजर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की मिठाइयों की जांच की औपचारिकता शुरू हो गई है। विभाग ने अब तक 70 सैंपल लिए हैं। जिन्हें प्रदेश के बाहर जांच के लिए भेजना होगा। जिसमें विभाग को 35 हजार रुपए का खर्च सिर्फ सैंपल जांच के लिए देना होगा। प्रदेश के एक मात्र खाद्य लैब की मान्यता 10 माह पहले समाप्त कर दी गई है। खाद्य पदार्थों की जांच करने वाली प्रदेश की एकमात्र प्रयोगशाला (सेंट्रल लैब) आउटडेटेड हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा नहीं उतरने से 2002 में कालीबाड़ी स्थित सरकारी लैब को नेशनल एक्रिडिएशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड केलिब्रेशन लेबोरेट्री (एनएबीएल) ने मान्यता खत्म कर दी है। अब प्रदेश में खाद्य पदार्थों रहे सैंपल जांच बीते 10 माह से नहीं हो पा रही है।
पुणे, इंदौर या कोलकाता भेजा जा रहा है सैम्पल
17 साल बाद भी तकरीबन 70 फीसदी खाद्य पदार्थों के सैम्पलों की जांच रायपुर में नहीं होती है। इसके लिए पुणे, इंदौर या कोलकाता सैम्पल भेजा जाता है। दरअसल, लैब में जांच मशीनें एफएसएसएआई से आने के बाद भी इंस्टाल नहीं हो पाई है। इसके अलावा ड्रग टेस्टिंग लैब रायपुर में 64 में 43 पद खाली हैं। फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड अथॉरटी ऑफ इंडिया ने बीते साल नवंबर में इस संबंध में आदेश जारी कर दिया था।
यह है कारण
एकमात्र फूड एनॉलिस्ट मान्यता समाप्त होने के पीछे एक बड़ा कारण यह है कि लैब में फूड टेस्टिंग एनालिस्ट की कमी होना है। यहां सिर्फ एक एनालिस्ट है जो कि लैब टेक्नीशियन के पद से प्रमोट हुए है। जबकि कम से कम पांच एनालिस्ट होने चाहिए। इस संबंध में एफएसएसएआई ने पत्र जारी कर मांग पत्र भेजने के लिए कहा था। एफएएसएसआई के स्टेंडर्ड के आधार पर लैब का अपग्रेडेशन किया जा रहा है। मशीनें भी इंस्टॉल हो चुकी है। स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए भी सरकार से पत्राचार किया गया है। अभी सैंपलों की जांच के लिए बाहर भेजा जा रहा है।

