दंतेवाड़ा : शनिवार को 4 नक्सलियों ने किरंदुल थाने में सरेंडर किया है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों में एक महिला भी शामिल है। ये सभी नक्सलियों की मलांगिर एरिया कमेटी में पिछले कई वर्षों से सक्रिय थे। 2013 में मतदान पार्टी पर हमला कर EVM मशीन को लूटने की कोशिश और 2015 में चोलनार IED ब्लास्ट की घटना में शामिल थे। इस नक्सल घटना में 5 जवान शहीद हुए थे। दंतेवाड़ा पुलिस की ओर से नक्सलियों को मुख्य धारा में लाने के लिए लोन वर्राटू (घर वापस आइए) अभियान चलाया जा रहा है। इसी के तहत नक्सलियों की मलांगिर एरिया कमेटी के सदस्य मोटू मरकाम, बामन राम कुंजाम, भीमा मरकाम और ललिता पोयम ने SP डॉ अभिषेक पल्लव व किरंदुल SDOP देवांश सिंह रौठार के सामने सरेंडर किया है। ये सभी जनमिलिशिया सदस्य हैं।
इन घटनाओं में थे शामिल
- मोटू मरकाम- संगठन में रहते हुए मोटू मरकाम हिरोली, मलांगिर एवं कलेपाल में रोड़ काटने, संत्री ड्यूटी करने , वाहनों की आगजनी करने व बड़े नक्सलियों के लिए बैठक की व्यवस्था करने जैसे मामलों में सक्रिय था।
- ललिता तामो – साल 2015 में चोलनार के पास एंटी लैंडमाइंस वाहन को ब्लास्ट करने को घटना व NMDC परियोजना के शावेल मशीन को आग लगाने की घटना में शामिल थी। चोलनार ब्लास्ट में 5 जवान शहीद हुए थे।
- बामन राम कुंजाम – साल 2013 में मतदान दल से EVM मशीन को लूटने की कोशिश व सुरक्षबलों पर अंधाधुंध फायरिंग करने की घटना में शामिल था।
- भीमा मरकाम – जनमिलिशिया सदस्य भीमा मरकाम भी साल 2015 में चोलनार IED ब्लास्ट की घटना में शामिल था। किरंदुल थाना में भीमा के खिलाफ भी कई नामजद अपराध दर्ज है।
मलांगिर एरिया कमेटी है नक्सलियों का मजबूत संगठन
दक्षिण बस्तर में नक्सलियों की मलांगिर एरिया कमेटी नक्सलियों की सबसे मजबूत कमेटी है। इन इलाकों में दर्जनों हथियारबंद माओवादी सक्रिय हैं। इलाके में ज्यादातर मलांगिर एरिया कमेटी के माओवादी ही अधिक घटनाओं को अंजाम देते हैं। लोन वर्राटू अभियान में इस एरिया कमेटी की कमर तोड़ दी ही। साल भर के अंदर सबसे ज्यादा इसी एटिया कमेटी के नक्सलियों ने सरेंडर किया है।
अब तक 102 इनामी नक्सलियों का हो चुका है सरेंडर
लगभग साल भर पहले दंतेवाड़ा पुलिस ने लोन वर्राटू यानी घर वापस आइए अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान से प्रभावित होकर दंतेवाड़ा पुलिस के सामने अब तक 102 इनामी सहित कुल 386 नक्सली सरेंडर कर चुके हैं। सरेंडर करने वालों में कई कमांडर स्तर के माओवादी भी शामिल हैं।

