देश दुनिया वॉच

‘गुलाम की छुट्टी’ से राहुल गांधी की ताजपोशी का रास्ता अब साफ!..दिग्विजय की हुई CWC में वापसी

Share this

नई दिल्ली। कांग्रेस में बड़े स्तर पर बदलाव को लेकर पार्टी आलाकमान को चिट्ठी लिखने वालें नेताओं को अब धीरे-धीरे पदमुक्त किया जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी के अंदर ही सवाल खड़ा करने का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। दरअसल 7 अगस्त को सोनिया गांधी को लिखी गई चिट्‌ठी में ‘फुल टाइम लीडरशिप’ की मांग की गई थी।

कांग्रेस वर्किंग कमेटी का नए सिरे से गठन

ऐसे में अब पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया ने पार्टी संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए राहुल की पसंदीदा टीम को मौका दिया है और महासचिव पद से बुजुर्ग नेताओं की छुट्‌टी कर दी है। कांग्रेस वर्किंग कमेटी का नए सिरे से गठन किया गया है। नया अध्यक्ष चुनने में सोनिया की मदद के लिए 6 नेताओं की नई कमेटी बनाई गई है।

हालांकि, गुलाम नबी आजाद, अंबिका सोनी, मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे नेताओं को नई सीडब्ल्यूसी में बरकरार रखा गया है। दिग्विजय सिंह को सीडब्ल्यूसी में परमानेंट इनवाइटी में शामिल किया गया है। फिलहाल अब जो नई लिस्ट जारी की गई है, उनमें गुलाम नबी आजाद, मोतीलाल वोरा, अंबिका सोनी, मल्लिकार्जुन खड़गे और लुइजिन्हो फैलेरियो को महासचिव पद से हटा दिया गया है।

राहुल की ताजपोशी में रुकावट

गौरतलब है कि गुलाम नबी उन 23 नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने सोनिया गांधी को 7 अगस्त को तब चिट्‌ठी लिखी थी, जब वे अस्पताल में भर्ती थीं। इस चिट्‌ठी में इन नेताओं ने पार्टी में ऐसी ‘फुल टाइम लीडरशिप’ की मांग की थी, जो ‘फील्ड में एक्टिव रहे और उसका असर भी दिखे’। इस चिट्ठी में फुलटाइम लीडरशिप और फील्ड में असर दिखाने वाली एक्टिवनेस जैसे शब्दों के इस्तेमाल से माना जा रहा है कि, ये 23 नेता राहुल गांधी को अध्यक्ष पद पर नहीं देखना चाहते। और दोबारा राहुल गांधी की ताजपोशी में दिक्कत बन सकते हैं।

दिग्विजय सिंह की वापसी

वहीं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और अपने बयानों के चलते अक्सर चर्चा में बने रहने वाले दिग्विजय सिंह की कांग्रेस वर्किंग कमेटी में दो साल बाद वापसी हुई है। वहीं, हाल ही में राजस्थान में पार्टी से बगावत कर चुके सचिन पायलट को अभी कूलिंग ऑफ पीरियड में रखा गया है। उन्हें पार्टी में क्या जिम्मेदारी दी जाए, इसका फैसला बाद में होगा।

 गुलाम नबी आजाद को सबसे बड़ा झटका

नई लिस्ट में सबसे बड़ा झटका गुलाम नबी आजाद को लगा है, क्योंकि वे राज्यसभा में अभी विपक्ष के नेता भी हैं। पिछली बार सीडब्ल्यूसी की मीटिंग में राहुल गांधी के एक कथित बयान का विरोध करने वालों में गुलाम नबी सबसे आगे थे। माना जा रहा है कि उन्हें अब राज्यसभा का दोबारा टिकट मिल पाना भी मुश्किल है। वहीं मोतीलाल वोरा, अंबिका सोनी, मल्लिकार्जुन खड़गे व गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री लुईजिन्हो फलेरियो को उम्र की वजह से हटाया गया है।

सोनिया गांधी अभी अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी

इसके अलावा कांग्रेस के अध्यक्ष पद को लेकर बात करें तो सोनिया गांधी अभी अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी। कांग्रेस के सूत्र बताते हैं कि अगले साल की शुरुआत में पंजाब या छत्तीसगढ़ में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का सत्र होगा। इसमें राहुल गांधी को दोबारा अध्यक्ष चुना जाना तय है।

Share this

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *