अक्कू रिजवी/कांकेर : जिले के पुलिस थाना लोहत्तर के थाना प्रभारी के द्वारा वहां तैनात आदिवासी वर्ग के आरक्षक को चप्पल से पीटने एवं जातिगत गाली-गलौज करने के मामले को राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग ने संज्ञान में लिया है। इस बाबत् पीड़ित पक्ष के द्वारा आयोग में न्याय हेतु गुहार भी लगाया गया है। कल ही आयोग के नाम पर एक शिकायत पत्र आयोग के सदस्य नितिन पोटाई को सौंपकर कार्यवाही करने की मांग की है। इधर समाज प्रमुखों के तरफ से भी इस मामले में कार्यवाही करने हेतु दबाव बनाया जा रहा है।
राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य नितिन पोटाई ने इस सम्पूर्ण मामले में कहा कि थाना प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य करते हुए किसी अधिकारी के द्वारा आदिवासी आरक्षक को चप्पलों से पीटना एवं जातिगत गाली गलौज करना शोभा नहीं देता है। इस घटना की जितनी भी निंदा की जाये वह कम है। यह मामला आदिवासी उत्पीड़न का मामला है। श्री पोटाई ने कहा कि भारत में हर व्यक्ति को सम्मान पूर्वक जीने का अधिकार है चाहे वह नौकरी पेशा व्यक्ति हो या फिर आम नागरिक यदि पुलिस के किसी कर्मचारी के द्वारा ड्यूटी के दौरान थाना में गणना के वक्त सही समय पर नहीं पहुचते है तो उन्हे लिखित में कारण बताओ नोटिस दिया जाना था अथवा पुलिस रूल्स रेग्युलेशन के अनुसार विधिवत कार्यवाही करना था इसके विपरित लोहत्तर थाना में पदस्थ थाना प्रभारी महेश के द्वारा प्रार्थी आरक्षक का बिना पक्ष जाने न केवल आदिवासी आरक्षक को चप्पलों से पीटा गया बल्कि जातिगत गाली-गलौज भी दी गई। यह इस समस्या का हल नहीं था । आयोग सदस्य नितिन पोटाई ने कहा कि चूंकि प्रार्थी आदिवासी वर्ग का है और उनके द्वारा आयोग के नाम से विधिवत आवेदन भी दिया गया है। इसलिए इस मामले को लेकर आयोग गंभीर है। श्री पोटाई ने कहा कि संविधान द्वारा आदिवासियों को विशेष अधिकार प्रदान किया गया है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के व्यक्तियों को चप्पलों से पीटना एवं गाली-गलौज किया जाना अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के अंतर्गत शामिल है जिसके लिए भारतीय दण्ड संहिता में सजा दिये जाने का भी प्रावधान है। पुलिस महकमा का एक छोटा सा सिपाही भी आदिवासियों से संबंधित कानूनों को अच्छी तरह जानना है फिर थाना प्रभारी जैसे पद पर आसीन पुलिस अधिकारी के द्वारा इस तरह का हरकत किया जाना समझ से परे है। बताया गया है कि पूर्व में भी उक्त थाना प्रभारी द्वारा मारपीट किये जाने एवं जातिगत गाली-गलौज किये जाने का मामला प्रकाश में आया है।आयोग के सदस्य नितिन पोटाई ने इस मामले में कहा कि घटना की जांच की जायेगी। इस विषय में पुलिस के अधिकारीयों से भी बात की जायेगी। संबंधितों को आयोग तलब किया जायेगा। चूंकि अ.ज.जा आयोग आदिवासियों के हित प्रहरी के रूप में कार्य करता है। इसलिए आयोग का मुख्य कार्य इस वर्ग के लोगों को संरक्षण प्रदान करता है। अतः मामलें में दोषी व्यक्ति के खिलाफ आयोग के द्वारा कड़ी से कड़ी कार्यवाही हेतु अनुशंसा की जायेगी ताकि इस तरह के घटनाओं की पुनव्ति पर रोक लगे।
थानेदार ने पीटा आदिवासी आरक्षक को, नितिन पोटाई ने कहा होगी कार्यवाही

