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सहायक उद्योगों के प्रति बीएसपी प्रबंधन के उपेक्षित रवैये से उद्योगपतियों में आक्रोश

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▪ एंसीलरी एसोसिएशन के पूर्व पदाधिकारियों की हुई आपात बैठक

• बीएसपी प्रबंधन पर बात नहीं सुनने तथा मनमानी करने का आरोप

तापस सन्याल/भिलाई नगर : बीएसपी एंसीलरी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व पदाधिकारियों ने बीएसपी प्रबंधन द्वारा सहायक उद्योगों के प्रति अपनाए जा रहे उपेक्षित रवैए को लेकर आक्रोश जताया है. पूर्व अध्यक्ष अरविंदर सिंह खुराना की अध्यक्षता में पूर्व पदाधिकारियों ने एक आपात बैठक में सहायक उद्योगों को हो रही परेशानियों की और बीएसपी प्रबंधन का ध्यान आकर्षित किया है. उद्योगपतियों का स्पष्ट कहना है कि बीएसपी प्रबंधन उन्हें हल्के में ले रहा और उनकी बातों को अनसुना कर रहा.

बैठक में उद्योगपतियों का कहना था कि पूरे भारत में करोना से तबाही मची हुई है. बीएसपी में भी अभी तक 300 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं. लेकिन बीएसपी प्रबंधन को अभी तक होश नहीं है कि यहां के जो सहायक उद्योग काम कर रहे हैं उन्हें कैसे चलाएं? पिछले वर्ष जब लॉकडाउन लगा था उस समय प्रबंधन ने 2 माह का डीपी एक्सटेंशन दिया था. लेकिन अब जब पहले से ज्यादा करोना घातक स्थिति में है और सब कुछ ठप पड़ा है तब डीपी एक्सटेंशन देने के लिए प्रबंधन को सोचना पड़ रहा है.

उद्योगपतियों का कहना था कि पहले के करोना और अब के करोना में काफी अंतर है. बीएसपी और उद्योगों में मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है. पिछले वर्ष यह स्थिति नहीं थी. पिछले वर्ष ऑक्सीजन सिलेंडर की भी कोई कमी नहीं थी जबकि इस बार वह भी बंद हो गया. इस बार पूरे देश में अलग-अलग राज्यों में खंड खंड लॉकडाउन के चलते स्थितियां और बिगड़ी हैं. सहायक उद्योगों के पास मुंबई, मद्रास, कोलकाता, चेन्नई, दिल्ली से माल आता है. कभी यहां लाकडाउन तो कभी वहां लॉकडाउन से स्थिति बहुत खराब है. लेकिन बीएसपी अभी भी शून्य की स्थिति में है जिसके कारण यहां के उद्योगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मटेरियल की कीमतों में 50 से 60% बेतहाशा वृद्धि हुई है. जो सहायक उद्योग माल देने की स्थिति में नहीं है उन्हें बीएसपी प्रबंधन द्वारा टॉर्चर किया जा रहा है कि हमें माल चाहिए ही. उद्योगपति पहले ही काफी डिस्टर्ब है और ऐसी स्थिति में बीएसपी प्रबंधन द्वारा ब्लैक लिस्ट में डालने की धमकी दी जा रही है.

उद्योगपतियों का कहना था कि बीएसपी प्रबंधन सकारात्मक दिशा में चर्चा नहीं कर रहा और उनकी बातों को अनसुना कर हल्के में ले रहा है. सुनने में यह भी आ रहा है कि जिसका जीएसटी पेड होगा उसी को पेमेंट मिलेगा. सीपीडी का मामला अपने आप में रुका ही है. परचेज में जो इंक्वायरी मिल रही है जिसके पास काम करने की शक्ति है उसके साथ ऐसे यूनिट को इंक्वायरी डाला जा रहा है जिसके पास कोई काम करने का अता पता नहीं है. वह बाहर से माल बनाता है या किसी को देता है उसके पास कोई व्यवस्था नहीं है. इसी तरह इंक्वायरी और परचेस में भी मनमानी की जा रही है.

बीईडब्ल्यू में हुई इस बैठक में पूर्व अध्यक्ष अरविंदर सिंह खुराना, पूर्व महासचिव चरणजीत सिंह खुराना, आशुतोष तिवारी, व्यास शुक्ला, पूर्व उपाध्यक्ष चमनलाल बंसल, पूर्व कोषाध्यक्ष जेके जैन, अभिजीत गोस्वामी, अनिल गुप्ता, आरके सिंह, देशराज यादव, डीआर स्वामी सहित बहुत सारे उद्योगपति उपस्थित थे.

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