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खास खबर : कोरोना काल मे भी बिहान की दीदियों ने हिम्मत नही हारा घर पहुच सेवाये दे रही है बिहान की दिदिया

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  • बिहान योजना से जुड़कर महिलाये हुई आत्मनिर्भर,आज व्यापार में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं पुरुषों को दे रही है कड़ी टक्कर

यामिनि चंद्राकर/छुरा : एक वो दौर था जब ग्रामीण क्षेत्र की महिलाए सिर्फ घर की चूल्हा चौका तक ही सीमित रहा करती थी लोग महिलाओ को सिर्फ घर के चार दिवारी में रखते थे आज भी हरियाणा यू पी जैसे राज्य में महिलाओं को घूंघट में रहने की परंपरा है महिलाओ को घर के काम को छोड़कर बाहरी कार्य करने पर सख्त परहेज है यही हाल महिलाओ का छत्तीसगढ़ में भी था लेकिन समय निकलते गया और महिलाए घर की चूल्हा चौकी के साथ बिहान योजना से जुड़कर एक सफल व्यापार करने लग गए आज ऐसे कई महिलाए छुरा क्षेत्र में देखी जा सकती है जो बिहान योजना से जुड़कर अनेक प्रकार के व्यापार कर पुरुष व्यापारियों से कंधे से कंधा मिलाकर अपने व्यापार को आगे बढ़ा रही है। आज पूरा देश वैश्विक महामारी से जूझ रहा है लोग कोरोना संक्रमण के चपेट में आकर काल के गाल में समा रहे है ऐसे नाजुक घड़ी में भी बिहान के दीदियों का हौसला न टूटना यह साबित कर रही है कि आज के दौर में महिलाएं काफी शसक्त व व्यापार के मामले में पुरुषों से कम नही है। आज छुरा क्षेत्र की महिलाएं बिहान योजना से जुड़कर अनेक प्रकार का सफल व्यवसाय कर रही है कई समूह की महिलाएं सब्जी उत्पादन, किराना की होम डिलीवरी, बॉस से बने बर्तन, मिट्टी से बने बर्तन, रेडी टू इट,फैंशी समान,पोल्ट्री फार्म,होटल, महिलाओ की कलाइयों का शोभा बढ़ाने वाली कंगन,अगरबत्ती निर्माण,आटा चक्की, मनिहारी समान का घर पहुच सेवा दे रहे है जो काबिले तारीफ है पहले महिलाए बिहान से जुड़ने से झिझक रही थी लेकिन अधिकारियो की अथक प्रयास से आज छुरा क्षेत्र में 17708 महिला बिहान योजना से जुड़कर आत्मनिर्भर बन चुकी है। वही छुरा विकासखण्ड को 04 कलस्टरों में बाटा गया है सबसे अच्छा कार्य ग्राम संगठन महिला समूह की महिलाओं द्वारा किया जा रहा है जिसमे 10 महिलाए मिलकर एक समूह बनाकर काम करते है ग्राम संगठन की महिलाएं अभी राज्य शासन के महत्वपूर्ण योजना गौठान योजना के अंतर्गत गोबर से जैविक खाद का निर्माण कर रही।

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