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राजिम कृषि उपज मंडी खोलने पूर्व विधायक उपाध्याय ने की पहल, मंत्री रविन्द्र चौबे ने मंडी खोलने का दिया आश्वासन

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  • राजिम विधानसभा क्षेत्र के किसान दोहरी मार झेल रहे है चुने हुए जनप्रतिनिधि नही ले रहे है किसानों की सुध

यामिनि चंद्राकर/छुरा : जिले के किसान लॉकडाउन के चलते खासे परेशान हैं वही पिछले दिनों चली तेज आंधी और झमाझम बारिश के साथ गिरे ओले ने राजिम विधानसभा क्षेत्र के किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है क्षेत्र के कई किसान आंधी तूफान और ओलावृष्टि से फसल बर्बाद होने के कारण कर्जदार हो चुके, सबसे ज्यादा परेशानी रबी फसल लगाएं किसानों को हो रही है, किसानों के सामने अभी वर्तमान समय मे सबसे बड़ी समस्या यह है कि जिन किसानों का फसल बर्बाद होने से बच गया है वो उपज कहां बेचे, किसानों को समझ में नहीं आ रहा है और धान की फसल की कटाई किसान कर चुके हैं। लगातार मांग करने के बावजूद जिले के राजिम कृषि उपज मंडी खोलने के आदेश नहीं दिए जा रहे हैं, वर्तमान में मंडी बंद है, जिसके चलते किसानों को उपज बेचने भटकना पड़ रहा है और अगर सरकार द्वारा कोई मंडी खोलने कोई पहल नही की जाती है तो क्षेत्र के किसान अपनी उपज को औने पौने दाम में व्यापारियों को बेचने को मजबूर होना पड़ेगा जिससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ेगा।

किसानों की समस्याओं को देखते हुए राजिम विधानसभा के पूर्व विधायक संतोष उपाध्याय ने कृषि मंत्री रविंद्र चौबे से चर्चा कर मांग किया कि राजिम कृषि उपज मंडी को जल्द खोलकर क्षेत्र के सैकड़ो किसानों की रवि फसल की धान की खरीदी शुरू किया जाए, मंत्री ने रविन्द्र चौबे ने पूर्व राजिम विधायक सन्तोष उपाध्याय को आश्वासन दिया है कि इस पर जल्द ही निर्णय होगा। पूर्व विधायक ने बताया कि बेमौसम बारिश के कारण फसलों को को नुकसान हुआ है, इससे किसान आहत है, किसान मंडी खुलने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि अपने उपज को सही दाम में भेज सकें। इस बार किसानों को दोहरी मार पड़ी है।

मंत्री से उन्होंने बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसान प्रभावित बड़ी संख्या में हुए हैं,मौसम की मार से नुकसान हुए किसानों को राहत राशि देने की भी मांग की गई है। क्योंकि सबसे ज्यादा नुकसान इससे राजिम विधानसभा के किसानों को हुआ है। वर्तमान में किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। लाकडाउन के कारण लोगों का व्यापार व्यवसाय पूरी तरह ठप हो गया है किसानो ने रवि फसल लगाने के लिए सेठ साहूकारों से खत्तु व बीज के लिए कर्ज लिए है अब मौसम की मार से पीड़ित किसानों को कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है।

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