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फिर विवादों में श्रीराम केयर हॉस्पिटल! कान दर्द का इलाज कराने पहुंची महिला की एंजियोप्लास्टी के बाद मौत

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Shriram Care Hospital in controversies again! Woman dies after angioplasty for ear pain treatment

रायपुर:  बिलासपुर के नेहरू नगर स्थित श्रीराम केयर हॉस्पिटल में महिला की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ। मस्तूरी के ठाकुरदेवा निवासी सुखम बाई साहू कान में दर्द की शिकायत लेकर इलाज कराने पहुंची थीं, लेकिन हृदय में ब्लॉकेज बताकर उनकी एंजियोप्लास्टी की गई। इसके बाद अस्पताल में ही उनकी मौत हो गई। परिजनों ने इसे चिकित्सकीय लापरवाही बताते हुए अस्पताल प्रबंधन और संबंधित डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बेटी का दावा है कि मां की मौत के बाद सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने सभी आरोपों को खारिज किया है।

परिजनों के मुताबिक, सुखम बाई साहू को कान में परेशानी थी। इलाज के लिए श्रीराम केयर हॉस्पिटल पहुंचने पर उन्हें जांच के लिए कोनी स्थित सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल भेजा गया। वहां कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक कुमार ने हृदय में ब्लॉकेज होने की जानकारी देते हुए एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की सलाह दी। इसके बाद महिला को वापस श्रीराम केयर हॉस्पिटल लाया गया, जहां एंजियोप्लास्टी की गई। लेकिन प्रक्रिया के बाद उनकी मौत हो गई।महिला की बेटी संगीता साहू ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि एंजियोप्लास्टी से पहले परिवार को जान के जोखिम और संभावित खतरे की जानकारी नहीं दी गई। बेटी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रक्रिया से महज 15 मिनट पहले उनकी मां को चार बिस्किट खिलाए गए थे। वहीं सहमति पत्र को लेकर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने दावा किया कि मां की मौत के बाद हस्ताक्षर कराए गए और दस्तावेज में पहले का समय दर्ज किया गया। परिजनों ने अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने की मांग की है।

महिला की मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन के जिम्मेदार लोगों और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के साथ अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने की मांग की। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी दूसरे परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े।

इधर, अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों के सभी आरोपों को गलत बताया है। प्रबंधन का कहना है कि महिला को करीब डेढ़ साल पहले हार्ट अटैक आया था और उन्हें चलने पर सांस फूलने की परेशानी भी थी। जांच में हृदय में ब्लॉकेज मिला था। एंजियोग्राफी की रिपोर्ट और वीडियो परिजनों को दिखाए गए थे और मरीज की सहमति के बाद ही एंजियोप्लास्टी की गई। प्रबंधन ने दावा किया कि सहमति पत्र का रिकॉर्ड उनके पास मौजूद है और उपचार से जुड़े दस्तावेज पुलिस को सौंप दिए गए हैं।

हंगामे की सूचना पर सिविल लाइन सीएसपी परमेश्वर तिलकवार और थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने परिजनों को समझाइश देकर शांत कराया। सीएसपी के मुताबिक, मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है। परिजनों ने इलाज में संदेह जाहिर किया है, जिसके आधार पर अस्पताल के दस्तावेजों और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

फिलहाल सुखम बाई साहू की मौत ने अस्पताल की उपचार प्रक्रिया और मरीज की सहमति से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ बेटी मां की मौत के लिए अस्पताल को जिम्मेदार ठहराते हुए न्याय की मांग कर रही है, तो दूसरी तरफ प्रबंधन अपनी ओर से किसी भी लापरवाही से इनकार कर रहा है। अब पुलिस जांच और मेडिकल दस्तावेजों की पड़ताल से ही स्पष्ट होगा कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या उपचार के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही बरती गई थी।

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