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लाभांडी-कचना-सद्दू योजना पर बवाल! RDA अधिकारियों को संजय सिंह ठाकुर का चैलेंज

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RDA’s Labhand-Kachna-Saddu Scheme: Neither care about the Constitution, nor the orders of the government, nor the RTI Act!

रायपुर, 16 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सिंह ठाकुर ने रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के अधिकारियों पर खुला आरोप लगाते हुए कहा कि लाभांडी, कचना एवं सद्दू नगर विकास योजना में कथित भ्रष्टाचार और प्लॉट आवंटन से संबंधित दस्तावेज आमजन से छिपाने के लिए प्राधिकरण के अधिकारी संविधान, राज्य शासन के आदेशों और सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं।

 

65 दिन बाद कहा—जानकारी प्रक्रियाधीन होने के कारण नहीं देंगे!

 

उन्होंने बताया कि 10 अगस्त 2026 को जमा किए गए सात आवेदनों पर पहले कोई जवाब नहीं दिया गया, जिसके कारण उन्हें प्रथम अपील दायर करने के लिए मजबूर होना पड़ा। आवेदन जमा करने के 65 दिन बाद जवाब दिया गया कि “चाही गई जानकारी प्रक्रियाधीन होने के कारण वर्तमान में जानकारी दिया जाना संभव नहीं है।” ठाकुर ने यह भी आरोप लगाया कि जन सूचना अधिकारी ने आवेदन के निराकरण के दौरान अपने नाम का उल्लेख तक नहीं किया।

 

क्या जानकारी माँगी गई थी?

 

लाभांडी, कचना एवं सद्दू नगर विकास योजनाओं के संबंध में गाँवों और खसरा नंबरों के चयन से जुड़ी नोटशीटें, फीजिबिलिटी रिपोर्ट, प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट, तकनीकी अध्ययन और स्थल निरीक्षण रिपोर्ट माँगी गई थीं। साथ ही, योजनाओं से लाभान्वित होने वाले व्यक्तियों या वर्गों की पहचान के लिए किए गए अध्ययन, सर्वेक्षण या विश्लेषण तथा योजनाओं के सामाजिक, आर्थिक, वित्तीय और सार्वजनिक हित से जुड़े मूल्यांकन की प्रतियाँ भी माँगी गई थीं। इसके अलावा, RDA के संकल्प, राज्य शासन को भेजे गए संपूर्ण प्रस्ताव और राज्य शासन द्वारा जारी स्वीकृति अथवा अनुमोदन आदेश की प्रमाणित प्रतियाँ भी माँगी गई थीं।

 

ठाकुर ने अधिकारियों के लिए रखा 501 रुपये का इनाम

 

ठाकुर ने कहा कि पहली बात, मनमाने तरीके से प्लॉट आवंटित करना संविधान के अनुच्छेद 14 में निहित समानता के सिद्धांत का उल्लंघन हो सकता है। इस योजना में कई लोगों को मनमाने तरीके से बहुमूल्य प्लॉट आवंटित करने का प्रस्ताव रखा गया है। दूसरी बात, छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के अनुसार, जन सूचना अधिकारी के लिए आवेदन का निराकरण करते समय अपना नाम लिखना अनिवार्य है।

 

तीसरी और महत्वपूर्ण बात यह है कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1) में उन सूचनाओं के अपवाद दिए गए हैं, जिन्हें उपलब्ध कराने से छूट प्राप्त है। लेकिन, ठाकुर के अनुसार, अधिनियम में कहीं भी यह नहीं लिखा है कि केवल जानकारी “प्रक्रियाधीन” होने के कारण उसे देने से इनकार किया जा सकता है।

 

ठाकुर ने कहा कि वे पिछले 20 वर्षों से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जनहित से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर रहे हैं और उसके आधार पर कई मुद्दे उठा चुके हैं, लेकिन यह पहली बार है कि उन्हें जानकारी प्रक्रियाधीन होने के आधार पर सूचना नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि जब यह योजना अगले पाँच वर्षों तक चलेगी, तो क्या प्राधिकरण पूरी अवधि में प्रक्रियाधीन होने का बहाना बनाकर सूचना देने से इनकार करता रहेगा?

 

ठाकुर ने रायपुर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जन सूचना अधिकारी और संबंधित अधिकारियों को चुनौती देते हुए घोषणा की कि यदि कोई अधिकारी सूचना का अधिकार अधिनियम में “प्रक्रियाधीन” शब्द के आधार पर सूचना रोकने का प्रावधान दिखा दे, तो वे अपनी ओर से प्रत्येक अधिकारी को 501 रुपये का इनाम देंगे।

 

योजना के पीछे भ्रष्टाचार की नीयत होने का आरोप

 

ठाकुर ने आरोप लगाया कि यह नगर विकास योजना पहले दिन से ही भ्रष्टाचार की नीयत से लाई गई है। उन्होंने कहा कि भू-स्वामियों को प्लॉट आवंटित करने के समय व्यापक भ्रष्टाचार किया गया है और आगे भी भ्रष्टाचार की तैयारी कर ली गई है। उनके अनुसार, RDA ने योजना में अपने लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये मूल्य के प्लॉट रखे हैं, जिन्हें बेचकर आगे भी भ्रष्टाचार किया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि यदि RDA सभी दस्तावेज उपलब्ध करा देता है, तो उसे यह योजना बंद करनी पड़ेगी।

 

ठाकुर ने कहा कि जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि योजना किस आधार पर तैयार की गई, प्लॉटों का आवंटन किन मानदंडों पर किया गया और क्या इसके लिए आवश्यक अध्ययन तथा शासन की स्वीकृति सहित सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया।

संजय सिंह ठाकुर

982 7110032

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