रायपुर। शराब घोटाला का केस छत्तीसगढ़ में काफी चर्चित है। लेकिन अब इस मामले में एक सवाल उठने लगा है , दरअसल, आयुक्त आबकारी आशीष श्रीवास्तव के खिलाफ चालान पेश होने के बाद भी अब तक निलंबन आदेश जारी नहीं हुआ है। बता दें कि ईओडब्ल्यू और एसीबी ने 14 अक्टूबर को विशेष न्यायालय में उनके खिलाफ चालान पेश किया था, लेकिन 16 अक्टूबर तक निलंबन की कार्रवाई सामने नहीं आई। वहीं, इसी मामले में पहले 22 अधिकारियों के खिलाफ चालान पेश होने के दिन ही निलंबन की कार्रवाई की गई थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आशीष श्रीवास्तव के मामले में कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है?
शराब घोटाले में इससे पहले 29 अधिकारियों के नाम आरोपपत्र में शामिल किए गए थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 7 जुलाई 2025 को चालान पेश होने के दिन ही 22 सेवारत अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था। अब अपर आयुक्त आबकारी आशीष श्रीवास्तव के खिलाफ चालान पेश होने के बाद भी निलंबन आदेश सामने नहीं आने से शासन की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
निलंबन को लेकर नियम क्या कहता है?
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1) में आपराधिक मामले की जांच या विचारण के दौरान शासकीय सेवक को निलंबित करने का प्रावधान है। रिपोर्ट के अनुसार, भ्रष्टाचार और नैतिक अधमता से जुड़े मामलों में चालान पेश होने पर निलंबन के प्रावधान का भी उल्लेख है। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित अधिकारी के मामले में विभागीय स्तर पर क्या प्रक्रिया अपनाई जा रही है और आदेश जारी होने में देरी की वजह क्या है।
पहले भी उठे थे आर्थिक लेन-देन को लेकर सवाल
आशीष श्रीवास्तव को लेकर पूर्व में प्रकाशित रिपोर्टों में कथित आर्थिक लेन-देन और आय से जुड़े कई दावे किए गए थे। इनमें ईडी से संबंधित बताए गए 54 लाख रुपये, ईओडब्ल्यू की जांच से जुड़े करीब दो करोड़ रुपये और हर महीने छह लाख रुपये तक के कथित लेन-देन का उल्लेख था। हालांकि, इन आंकड़ों की अवधि, आधार और आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। इसलिए इन दावों को जांच से पुष्ट तथ्य नहीं माना जा सकता।
शासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
इस मामले में अधिकारी को निलंबन से बचाने के कथित प्रयासों की चर्चाएं भी सामने आई हैं, लेकिन इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में शासन की ओर से आधिकारिक स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
गौरतलब है कि चालान पेश होना आरोपों के न्यायिक रूप से सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में होगा। हालांकि, संबंधित नियमों के अनुपालन और पहले की गई कार्रवाई के मद्देनजर अब सबकी निगाहें शासन के अगले कदम पर टिकी हैं। सवाल यही है कि अपर आयुक्त आशीष श्रीवास्तव के निलंबन पर फैसला कब होगा और क्या इस मामले में भी पहले जैसी कार्रवाई की जाएगी?

