If you wander in vain, then the sticks are hard: Treatment of ‘Romeo’ and ‘addicts’ starts in Balod, special ‘dose’ of the police captain!
बालोद:(संवाददाता फिलिप चाको ) अगर आप भी आधी रात को बिना किसी काम के चौराहे पर ‘मजनू’ बनकर फिजाओं में आशिकी घोल रहे हैं, या ‘नशे की खुमारी’ में खुद को किसी रियासत का राजा समझकर आवारागर्दी कर रहे हैं, तो जरा संभल जाइए! बालोद पुलिस अब आपको कोई ‘लव लेटर’ या चेतावनी पत्र नहीं, बल्कि सीधे ‘लट्ठ-प्रसाद’ बांटने के मूड में आ चुकी है।
जिले के पुलिस कप्तान किरण चव्हाण ने बालोद की आबो-हवा को साफ करने का ऐसा धांसू मास्टरप्लान बनाया है कि ‘छोटे-मोटे नशेड़ियों’ से लेकर ‘बड़े-बड़े सुरमाओं’ तक की नींद उड़ गई है। कप्तान साहब का गणित एकदम सीधा है— जब बाजार में नशे के खरीददार (यानी ये आवारा मजनू) ही नहीं बचेंगे, तो ‘बड़े मगरमच्छ’ अपनी नशीली दुकान कहां चलाएंगे?
इसी रणनीति के तहत आधी रात को जब आधी दुनिया सो रही थी, तब एसडीओपी विनय कुमार और कोतवाली थाना प्रभारी शिशुपाल सिन्हा अपनी टीम के साथ हाथों में कड़क लट्ठ थामे गश्त पर निकले। जो जहां ‘ज्ञान’ बांटता या नशा फरमाता मिला, उसे पुलिसिया अंदाज में कायदे से ‘समझाया’ गया।
पुलिस का सीधा और साफ पैगाम है —”या तो खुद सुधर जाओ, वरना सुधारने का ठेका बालोद पुलिस ने ले रखा है!”
अब शहर की गलियों में आशिकी झाड़ने और सुट्टा उड़ाने वालों को यह समझ लेना चाहिए कि बालोद की पुलिस अब केवल खाकी में नहीं, बल्कि ‘फुल एक्शन मोड’ में है। जनता भी पुलिस की इस लाठी-चार्ज थ्योरी पर तालियां बजा रही है, आखिर बूंद-बूंद से ही घड़ा भरता है। अब देखना यह है कि बालोद के ‘रंगबाज़’ पुलिस के इस लट्ठ-पुराण से कितना सबक लेते हैं, या फिर अगला नंबर किसका आता है!

