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‘छात्रों की गूंज’ के जवाब में ‘झूठ की गूंज’! राहुल गांधी के 40 दावों का फैक्ट-चेक

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In response to the ‘echo of students’, ‘echo of lies’! Fact-check of 40 claims of Rahul Gandhi

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार के खिलाफ ‘छात्रों की गूंज’ नाम से कैंपेन शुरू किया है, लेकिन इस कैंपेन के जवाब में एक ऐसी वेबसाइट ने लोगों का ध्यान खींचा है, जिसे ‘झूठ की गूंज’ (jhoothkigoonj) नाम दिया गया है।

‘झूठ की गूंज’ वेबसाइट किसने बनाई, ये बात तो सामने नहीं आई है, लेकिन इस वेबसाइट पर जारी होने वाले कंटेंट से ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसे कांग्रेस विरोधी लोगों ने बनाया है।

 

‘झूठ की गूंज’ वेबसाइट पर राहुल गांधी के दावों का फैक्ट-चेक

राहुल गांधी के कैंपेन के खिलाफ बनी इस वेबसाइट ने भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों का ध्यान खींचा है। कांग्रेस नेता अब तक ‘छात्रों की गूंज’ नाम से चार इवेंट कर चुके हैं। वहीं यह ‘झूठ की गूंज’ वेबसाइट इन इवेंट में राहुल के दावों की सच्चाई की जांच (फैक्ट-चेक) करने का दावा करती है।

 

इस वेबसाइट को भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों का समर्थन मिल रहा है, लेकिन बीजेपी ने इस वेबसाइट से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है।

 

वेबसाइट पर भी इसे बनाने वालों का कोई सीधा जिक्र नहीं है, लेकिन ये वेबसाइट बनने के साथ ही सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है। कुछ लोगों ने इसे ‘राष्ट्रवादी रिसर्चर्स’ और Gen Z (आज की युवा पीढ़ी) का काम बताया है।

 

‘झूठ की गूंज’ वेबसाइट पर कैसा कंटेंट?

jhoothkigoonj वेबसाइट पर लिखा है, ‘चार रैलियां, चालीस दावे और एक answer key। यहां वे सभी झूठ दिए गए हैं जो राहुल गांधी ने अपने तथाकथित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान बोले।’ इससे साफ पता चलता है कि बीजेपी के खिलाफ राहुल की मुहिम में यह वेबसाइट किस पक्ष में है।

इस वेबसाइट पर बताया गया है, ‘राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज कैंपेन के चार इवेंट के दौरान 40 दावे किए, जिनमें से 29 गलत और 11 गुमराह करने वाले थे।’

 

इसमें आगे कहा गया है कि राहुल ने कहा था कि नौकरी की तलाश कर रहे 1,000 युवाओं में से लगभग 36 को पक्की नौकरी मिलेगी। उन्होंने कहा कि मोटे तौर पर 300 बेरोजगार रहेंगे और लगभग 700 गिग वर्कर (अस्थायी या कॉन्ट्रैक्ट वर्कर) बनेंगे।

 

इस दावे को गलत बताते हुए, वेबसाइट PLFS यूनिट-लेवल डेटा का हवाला देती है और दावा करती है कि 2025 में 15-29 साल की उम्र के हर 100 ग्रेजुएट में से 26 के पास सैलरी वाली नौकरी है।

 

राहुल की एक और बात, जिसमें उन्होंने लगभग 29% महिलाओं को शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ा, ऐसा दावा किया था। इस पर वेबसाइट का कहना है कि उन्होंने पुराने NFHS डेटा का सहारा लिया।

 

वेबसाइट पर बताया गया है, ‘जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है, NFHS डेटा से जीवनसाथी द्वारा की जाने वाली शारीरिक और/या यौन हिंसा में साफ कमी दिखी है: (2005-06) में 37.2% से घटकर (2023-24) में 22.3% हो गई है।’

 

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