CG Snakebite Scam: Turning death into a source of income! Two Home Guard personnel arrested in snakebite scam.
CG Snakebite Scam: बिलासपुर। जिले में सर्पदंश से मौत के फर्जी मामलों के जरिए शासन की सहायता राशि हड़पने के बहुचर्चित रैकेट की जांच में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने इस मामले में सिम्स पुलिस चौकी में पदस्थ रहे दो नगर सैनिकों को गिरफ्तार किया है। दोनों को न्यायालय में पेश करने के बाद रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। एएसपी पंकज पटेल ने बताया कि सरकंडा के बंधवापार में रहने वाले रामकुमार पाटनवार (40) और सतनाम नगर अमेरी निवासी रामेश्वर भास्कर (53) नगर सैनिक हैं। दोनों की पोस्टिंग लंबे समय तक सिम्स चौकी में रही। एक वर्तमान में भी सिम्स चौकी में कार्यरत रहा। जांच में पुलिस के सामने आया है कि दोनों नगर सैनिक हीरा खांडे गिरोह के लिए सूचना तंत्र का काम करते थे।
जब भी सिम्स में किसी व्यक्ति का शव पोस्टमार्टम के लिए पहुंचता था, दोनों तत्काल गिरोह के सदस्य महेंद्र मनहर को इसकी जानकारी देते थे। इसके बाद मनहर अस्पताल पहुंचकर मृतक के स्वजन से संपर्क करता था और उन्हें शासन से मिलने वाली आपदा सहायता राशि का लालच देकर मौत का कारण सर्पदंश बताने के लिए तैयार करता था। पुलिस जांच के अनुसार कई मामलों में वास्तविक मौत का कारण कुछ और होने के बावजूद स्वजन को फर्जी सर्पदंश का दावा करने के लिए प्रेरित किया जाता था।
इसके बाद फर्जी दस्तावेज तैयार कर शासन के आपदा राहत कोष से सहायता राशि प्राप्त की जाती थी। आरोप है कि इस पूरे षड्यंत्र में सूचना उपलब्ध कराने और परिजनों को तैयार कराने के एवज में दोनों नगर सैनिकों की सक्रिय भूमिका थी। जिले में सर्पदंश के फर्जी मामलों की जांच के दौरान अब तक डाक्टर, अधिवक्ता, तहसील और एसडीएम कार्यालय के कर्मचारी सहित कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
पुलिस का कहना है कि यह एक संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहा था, जिसमें अलग-अलग स्तर पर लोगों की भूमिका सामने आ रही है। अधिकारियों के मुताबिक दोनों आरोपितों से रिमांड के दौरान पूछताछ कर रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका और फर्जी मामलों की संख्या के संबंध में जानकारी जुटाई जाएगी। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं। सर्पदंश के फर्जी मामलों की जांच में पुलिस को पता चला है कि पूरे रैकेट की शुरुआत सिम्स अस्पताल से होती थी।
जांच के अनुसार जैसे ही किसी मृतक का शव पोस्टमार्टम के लिए पहुंचता, गिरोह से जुड़े लोगों को इसकी सूचना दे दी जाती थी। इसके बाद गिरोह का सदस्य अस्पताल पहुंचकर मृतक के स्वजन से संपर्क करता और उन्हें शासन से मिलने वाली आपदा सहायता राशि का लालच देता था। यदि मौत किसी अन्य कारण से हुई होती, तब भी स्वजन को सर्पदंश की कहानी बताने के लिए तैयार किया जाता था। पुलिस का दावा है कि सूचना देने और स्वजन को तैयार कराने में कुछ कर्मचारियों की भी भूमिका सामने आई है। इसी आधार पर सिम्स चौकी में पदस्थ रहे दो नगर सैनिकों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस तरीके से कितने मामलों में फर्जीवाड़ा किया गया।
पुलिस को उम्मीद है कि गिरफ्तार किए गए दोनों नगर सैनिकों से पूछताछ में रैकेट से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आएंगे। जांच एजेंसियां यह जानने का प्रयास करेंगी कि सूचना देने के बदले उन्हें क्या लाभ मिलता था, किन-किन मामलों में उन्होंने भूमिका निभाई और गिरोह के अन्य सदस्यों से उनका संपर्क कैसे होता था। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि अस्पताल, राजस्व कार्यालय और अन्य विभागों के कितने कर्मचारी इस नेटवर्क से जुड़े थे। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ में मिले तथ्यों के आधार पर अन्य संदिग्धों को भी तलब किया जा सकता है। यदि नए साक्ष्य मिले तो मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। पूरे प्रकरण में आर्थिक लेनदेन और सरकारी सहायता राशि के दुरुपयोग की भी अलग से जांच की जा रही है।

