कवर्धा: कबीरधाम जिले में इन दिनों एक साधारण सा दिखने वाला निमंत्रण पत्र राजनीतिक हलकों में असाधारण चर्चा का विषय बन गया है। मामला वन विभाग के जंगल सफारी उद्घाटन का है, लेकिन असली चर्चा उद्घाटन से ज्यादा उस सूची की हो रही है—जिसमें नाम होने चाहिए थे… पर हैं नहीं।
चाय की दुकानों से लेकर चौक-चौराहों तक एक ही सवाल गूंज रहा है
आखिर जिला भाजपा अध्यक्ष और पंडरिया के विधायक का नाम निमंत्रण पत्र से गायब क्यों है?
लोगों के बीच यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि क्या यह सिर्फ एक “प्रोटोकॉल की गलती” है या फिर इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक चाल छिपी हुई है भाजपा के अंदरखाने में भी यह मुद्दा अब धीरे-धीरे तूल पकड़ता जा रहा है।
कुछ कार्यकर्ताओं का मानना है कि यह सीधे-सीधे संगठन की अनदेखी है। उनका कहना है कि जब पार्टी का जिला अध्यक्ष ही निमंत्रण पत्र में जगह नहीं पा रहा, तो यह संकेत है कि कहीं न कहीं संगठन और सत्ता के बीच तालमेल बिगड़ रहा है।
वहीं पंडरिया के विधायक के समर्थकों में भी नाराजगी साफ झलक रही है। उनके बीच यह चर्चा है कि एक जनप्रतिनिधि, जिसने क्षेत्र में काम किया है, उसका नाम तक शामिल न करना—क्या यह सम्मान की कमी नहीं है
अब बात यहीं खत्म नहीं होती। राजनीतिक गलियारों में “गुटबाजी” शब्द फिर से सुर्खियों में है।
कुछ लोग इसे सीधे-सीधे अंदरूनी राजनीति का परिणाम बता रहे हैं—
कौन किसका है, और कौन किसको पसंद नहीं करता”—यही खेल अब खुलेआम दिखने लगा है।
कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की मानें तो यह सिर्फ शुरुआत है। अगर समय रहते ऐसी नाराजगी को नहीं संभाला गया, तो आने वाले चुनाव में इसका असर जमीन पर साफ दिख सकता है।
कार्यकर्ता अगर मन से काम न करें, तो बड़े से बड़ा समीकरण भी बिगड़ जाता है।
यह कार्यक्रम प्रदेश स्तर का कार्यक्रम है क्योंकि जंगल सफारी सारे प्रदेश के जनता के लिए है ना कि विधानसभा क्षेत्र के लिए
चाय पर बैठे एक बुजुर्ग कार्यकर्ता की बात शायद सबसे ज्यादा सटीक लगी
जब घर के लोग ही एक-दूसरे को नजरअंदाज करने लगें, तो बाहर वाले क्या सम्मान देंगे?
अब देखना दिलचस्प होगा कि यह “निमंत्रण पत्र की राजनीति” यहीं थमती है या आने वाले दिनों में कोई बड़ा राजनीतिक मोड़ लेती है।
फिलहाल कबीरधाम में चाय ठंडी हो रही है… लेकिन चर्चा अभी भी गरम है।
पत्रकार दीपक तिवारी

