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CG HIGH COURT: चेक बाउंस केस में आत्मदाह की धमकी पर HC का फूटा गुस्सा, कहा- ‘अदालत को डराने की कोशिश’…

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CG HIGH COURT: चेक बाउंस केस में आत्मदाह की धमकी पर HC का फूटा गुस्सा, कहा- ‘अदालत को डराने की कोशिश’…

CG HIGH COURT: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अवमानना मामले की सुनवाई के दौरान न्यायिक मर्यादा और अनुशासन को सर्वोपरि बताया है। दरअसल दो पक्षकारों ने कोर्ट परिसर में आत्मदाह करने की धमकी दी थी। इस मामले में हाईकोर्ट ने दोनों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया था। इस मामले में दोनों ने निचली अदालत में लिखित रूप में तो खेद जताया, लेकिन मौखिक रूप से यह तर्क दिया कि वे केवल क्षमा मांग रहे हैं, माफी नहीं।

 

बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सिमगा के कोर्ट में चेक बाउंस के मामले में गजेंद्र सिंह और सुशीला सिंह के खिलाफ मामला चल रहा है। बलौदाबाजार के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने हाई कोर्ट को एक शिकायत भेजी थी, इसमें बताया कि दोनों अभियुक्तों ने न केवल अदालत की कार्यवाही में व्यवधान डाला, बल्कि पीठासीन अधिकारी को एक लिखित नोटिस भी दिया। इस नोटिस में अधिकारी के विरुद्ध बेहद अपमानजनक, अभद्र और मानहानि करने वाले आरोप लगाए गए थे। इस पत्र पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया।

 

26 नवंबर 2025 को जारी आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपियों का यह कृत्य सीधे तौर पर आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है। हालांकि बाद में दोनों ने कोर्ट से माफी मांगी। पीठासीन अधिकारी ने हाईकोर्ट को भेजी गई जानकारी में बताया कि गजेंद्र सिंह ने कोर्ट में कहा- हम क्षमा मांग रहे हैं, माफी नहीं मांग रहे हैं। माफी अपनी गलती की मांगी जाती है और क्षमा अपने से बड़ों से मांगी जाती है। इसके अलावा यह भी धमकी दी कि हमें न्याय नहीं मिला तो हम गाड़ी के पेट्रोल से यहीं सिमगा कोर्ट में आत्महत्या कर लेंगे।

 

केस दूसरी अदालत में ट्रांसफर करने के निर्देश

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस व्यवहार को कोर्ट की गरिमा के खिलाफ मानते हुए कहा है कि अवमाननाकर्ता को अपने आचरण पर कोई पछतावा नहीं है, बल्कि वह कोर्ट को डराने का प्रयास कर रहा है। हाईकोर्ट ने मामले को जेएमएफसी कोर्ट से दूसरे कोर्ट में ट्रांसफर करने का आदेश दिया है।

 

हाईकोर्ट करेगा आचरण की निगरानी

हाईकोर्ट ने कहा कि अब हाईकोर्ट खुद इन अवमाननाकर्ताओं के आचरण की मॉनिटरिंग करेगा। मामला जिस नई अदालत में जाएगा, उसे नियमित अंतराल पर केस की प्रगति रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपनी होगी। हाईकोर्ट ने अवमाननाकर्ताओं को चेतावनी दी है कि वे कार्यवाही में सहयोग करें और कोर्ट की मर्यादा का पालन करें। अगली सुनवाई अब 4 मई को होगी। इस दौरान प्रगति रिपोर्ट देनी होगी।

 

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