कोरबा: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में मॉल निर्माण के लिए निजी जमीन पर कथित कब्जे के मामले में अब कानूनी कार्रवाई तेज हो गई है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद कोरबा पुलिस अधीक्षक (SP) ने शपथ पत्र के साथ जांच रिपोर्ट पेश कर दी है। कोर्ट ने संबंधित मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया है कि पुलिस की सप्लीमेंट्री रिपोर्ट पर दो सप्ताह के भीतर विधि अनुसार निर्णय लिया जाए।
ये है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, कोरबा निवासी अंकित सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पाम मॉल निर्माण के दौरान उनकी निजी जमीन पर अवैध कब्जा किया गया और राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी की गई। इस संबंध में वर्ष 2020 में कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी, लेकिन पांच साल बीतने के बाद भी पुलिस ने ठोस कार्रवाई नहीं की । मामले में देरी को लेकर याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद कोर्ट ने कोरबा के एसपी से शपथ पत्र मांगा।
7 बिंदुओं पर हुई जांच
कोरबा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने 10 नवंबर 2025 को पुलिस को सात बिंदुओं पर 60 दिनों के भीतर जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। हालांकि निर्धारित अवधि में रिपोर्ट पेश नहीं की गई।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से बताया गया कि जांच विधि अनुसार की गई है, लेकिन राजस्व अभिलेखों की प्राप्ति और विभागीय पत्राचार के कारण देरी हुई। एसपी द्वारा शपथ पत्र प्रस्तुत कर बताया गया कि सातों बिंदुओं पर जांच कर अंतिम सप्लीमेंट्री रिपोर्ट 7 फरवरी को ट्रायल कोर्ट में प्रस्तुत कर दी गई है।
हाईकोर्ट का स्पष्ट निर्देश
हाईकोर्ट ने कहा कि अब जब रिपोर्ट प्रस्तुत हो चुकी है, तो संबंधित मजिस्ट्रेट पुलिस की सप्लीमेंट्री रिपोर्ट पर दो सप्ताह के भीतर कानून के अनुसार आदेश पारित करें। साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता को रिपोर्ट से किसी प्रकार की आपत्ति है, तो वे विधि सम्मत उपाय अपना सकते हैं।

