रायपुर वॉच

तिरछी नजर 👀 : रायपुर में पुलिस कमिश्नरी….…. ✒️✒️….

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रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम पर 31 दिसंबर को कैबिनेट की बैठक में फैसला होगा। सरकार एक्ट में संशोधन करने जा रही है और औपचारिक रूप से कैबिनेट बैठक में मुहर लगेगी।
चर्चा है कि आईपीएस लॉबी एक जनवरी से रायपुर में पुलिस कमिश्नर बिठाने के पक्ष में हैं। मगर में एक्ट में संशोधन के लिए अध्यादेश लाना जरूरी है। मगर बीच का रास्ता भी निकालने की चर्चा है, ताकि एक्ट में संशोधन हो जाए और कानूनी अड़चन आए बिना रास्ता निकल जाए। फिर भी पहली जनवरी को पुलिस कमिश्नर व्यवस्था शुरू हो जाएगी, इसमें थोड़ी समस्या है। चाहे कुछ भी हो, जनवरी में हर हालत में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू हो जाएगी।

नए भी कमिश्नर की दौड़ में

रायपुर का पुलिस कमिश्नर कौन होगा, इसको लेकर कई नाम सामने आए हैं। रायपुर आईजी अमरेश मिश्रा और दुर्ग आईजी रामगोपाल गर्ग तो पुलिस कमिश्नर के दौड़ में हैं ही, कुछ और नाम चर्चा में हैं इनमें सरगुजा आईजी दीपक झा, राजनांदगांव रेंज आईजी अभिषेक शांडिल्य व अजय यादव भी हैं।
जनवरी में आईजी के पद पर पदोन्नत होने वाले कुछ और पुलिस अफसर पारूल माथुर, प्रशांत अग्रवाल, मिलना कुर्रे भी दौड़ में शामिल हो गए हैं। हालांकि मिलना को छोड़,बाकी दोनों की दावेदारी को कमजोर माना जा रहा है। इसकी वजह ये है कि पिछली सरकार में
पावरफुल रहे हैं और जांच के घेरे में आए हैं। सुरजपुर के रहने वाले प्रशांत अग्रवाल एक बड़े कारोबारी घराने से ताल्लुक रखते हैं।

बृजमोहन-अजय के तेवर
की दिल्ली में गूंज

चर्चा है कि भाजपा हाईकमान ने छत्तीसगढ़ के दो प्रमुख नेताओं के विषय को गंभीरता से लिया है। पहली सांसद बृजमोहन अग्रवाल की सीएम को लिखी वो चिट्ठी, जिसमें उन्होंने जमीन की बढ़ी हुई गाइडलाइन दरों को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने पर जोर दिया था।
बृजमोहन ने तो सार्वजनिक तौर पर चेता दिया था कि गाइडलाइन रेट बढ़ाने से छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है। बृजमोहन की चिट्ठी के बाद हड़बड़ाई सरकार को पुनरीक्षण का निर्णय लेना पड़ा। इसी तरह पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ अंजोर विजन डाक्यूमेंट-2047 को लेकर जिस तरह विधानसभा में अपनी ही सरकार को घेरा है,उसकी गुंज दिल्ली तक सुनाई दी है। हाईकमान दोनों के मुद्दों पर नजर रखे हुए है। इस पर क्या होता है, यह तो आने वाले दिनों में पता चलेगा।

गड़बड़ी के दोषी, लेकिन कार्रवाई नहीं…

प्रदेश के सरकारी कालेजों में कम्प्यूटर और अन्य सामग्री की खरीदी में अनियमितता उजागर हुई है और एक-दो प्राचार्यों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई है।
ताजा जानकारी यह है कि रायपुर संभाग के कई कालेजों में खरीदी में गड़बड़ी की शिकायत आई है। इसकी जांच भी हुई है। करीब आधा दर्जन कालेजों के शिक्षक और क्लर्क के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा कर दी गई है। मगर आगे की कार्रवाई रोक दी गई है। कार्रवाई क्यों रोक दी गई है, इसका कोई ठोस कारण नहीं बताया गया है। मगर इसको लेकर कई तरह की चर्चा है।

संघ दफ्तर की तरफ रुख

राज्य में अलग-अलग जगह इन दिनों धरना प्रदर्शन हो रहे हैं, जहाँ सरगुजा रायगढ़ खैरागढ़ में जल जंगल ज़मीन को लेकर लगातार विरोध हो रहे हैं तो नवा रायपुर स्थित माना तूता में डीएड अभ्यर्थी प्रदर्शन कर रहे हैं। कड़ाके की इस ठंड में किसी का भी जोश कम नहीं हुआ है। रिक्त पदों में भर्ती की मांग को लेकर डीएड अभ्यर्थी आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं..इस कड़कड़ाती सर्दी में कई अभ्यर्थियों की तबीयत खराब होने की सूचना मिली है, पर कहीं से कोई राहत नज़र नहीं आ रही है। सरकार के प्रतिनिधियों से कई स्तर पर चर्चा के बाद भी कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने से डीएड अभ्यर्थी काफी हताश नजर आ रहे हैं।
खबर मिली कि सब तरफ़ से निराश अभ्यार्थियों ने इस बीच संघ कार्यालय जागृति मंडल का रूख किया और संघ के शीर्षस्थ अधिकारियों से मुलाक़ात की, शायद इस मुलाक़ात के बाद मंत्री जी हरकत में आए ,और डीएड अभ्यर्थियों को कोई शुभ समाचार मिले।

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