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अनिल अंबानी की बढ़ी मुश्किलें, ED ने ₹4,462 करोड़ की नई संपत्ति को किया अटैच

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दिल्ली – अनिल अंबानी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड के बैंक धोखाधड़ी मामले में नवी मुंबई स्थित धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी (DAKC) की 132 एकड़ जमीन को अटैच कर लिया है। इस संपत्ति की कीमत करीब 4,462 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसके साथ ही अनिल अंबानी ग्रुप से जुड़ी कुल जब्त संपत्तियों का मूल्य अब 7,500 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।

ईडी की स्पेशल टास्क फोर्स ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निवारण कानून (PMLA) के तहत की है। जांच में सामने आया कि रिलायंस कम्युनिकेशंस और अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) की अन्य कंपनियों ने बैंक से लिए गए लोन का दुरुपयोग किया और रकम को इधर-उधर ट्रांसफर किया। इससे पहले ईडी ने इन कंपनियों की 42 संपत्तियों को 3,083 करोड़ रुपये के मूल्य पर कुर्क किया था।

यह पूरा मामला सीबीआई की एफआईआर से शुरू हुआ था, जिसमें अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों पर धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। आरोप है कि कंपनियों ने बैंकों से लिए गए लोन का इस्तेमाल कारोबारी उद्देश्यों के बजाय अन्य जगहों पर किया।

3 नवंबर को रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि ईडी ने उनकी कुछ संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं। कंपनी ने बयान जारी कर कहा कि यह कार्रवाई PMLA के तहत जांच का हिस्सा है, लेकिन इसका उनके बिजनेस, निवेशकों या कर्मचारियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि अनिल अंबानी पिछले साढ़े तीन साल से कंपनी के बोर्ड में नहीं हैं।

ईडी के मुताबिक, 2010 से 2012 के बीच रिलायंस कम्युनिकेशंस और इसकी सहयोगी कंपनियों ने देसी और विदेशी बैंकों से 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज लिया था। इनमें से कई बैंकों ने बाद में इन खातों को “फ्रॉड” घोषित कर दिया। जांच में यह भी सामने आया कि एक कंपनी द्वारा लिया गया लोन दूसरी कंपनी के कर्ज चुकाने में इस्तेमाल हुआ, जबकि कुछ रकम म्यूचुअल फंड्स और फिक्स्ड डिपॉजिट्स में लगाई गई, जिसे बाद में समूह की अन्य कंपनियों में वापस ट्रांसफर किया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 13,600 करोड़ रुपये “एवरग्रीनिंग” यानी पुराने कर्ज चुकाने के लिए नए लोन से चुकाने की प्रक्रिया में लगाए गए। इसके अलावा, 12,600 करोड़ रुपये संबंधित कंपनियों को ट्रांसफर हुए और 1,800 करोड़ रुपये म्यूचुअल फंड्स में पार्क किए गए।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि 2017 से 2019 के बीच यस बैंक ने रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (RHFL) और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (RCFL) में करीब 5,000 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जिसमें से 3,300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अब तक बकाया है। ईडी ने पाया कि रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड से जुटाए गए धन को सीधे इन कंपनियों में निवेश नहीं किया जा सकता था, इसलिए पैसे को यस बैंक के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से ट्रांसफर किया गया।

सीबीआई और ईडी दोनों एजेंसियों की जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में लोन अप्रूवल प्रक्रिया में जानबूझकर लापरवाही की गई। कई बार लोन जारी करने से पहले जरूरी दस्तावेज अधूरे थे और सिक्योरिटी की जांच तक नहीं हुई। एजेंसियों का कहना है कि यह “जानबूझकर की गई चूक” का मामला है।

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