रामा वैली कॉलोनी में बिल्डर ने बेचा शासकीय तालाब, सीमांकन की उठी मांग
बिलासपुर। रायपुर रोड स्थित रामा वैली रेजिडेंशियल वेलफेयर सोसायटी के पदाधिकारियों ने सोमवार को प्रेस क्लब में संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर कॉलोनी निर्माण में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं का खुलासा किया। सोसायटी के सचिव पी.वी.आर. नायडू, उपाध्यक्ष सी.पी. शर्मा, मनोज गर्ग एवं शोभन दत्ता ने बताया कि बिल्डर द्वारा कॉलोनी विकास के नाम पर शासकीय भूमि का अतिक्रमण कर बेचान किया गया है।
पदाधिकारियों ने बताया कि कॉलोनी की संपूर्ण भूमि का सीमांकन आवश्यक है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन-किन क्षेत्रों में गड़बड़ी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के स्वीकृत नक्शे के विपरीत कार्य कर कॉलोनी के ग्रीनलैंड क्षेत्र में व्यावसायिक परिसर बना दिए गए हैं। गार्डन और पार्क की जमीन पर भी दुकानें और क्लब बना दिए गए।
उन्होंने बताया कि कॉलोनी में 57,285 वर्गफीट की ग्रीनलैंड भूमि में से करीब 20,000 वर्गफीट में चार गार्डन बने हैं, जबकि शेष भूमि पर अवैध पार्किंग और दुकानों का निर्माण कर उसे बेच दिया गया है। लगभग 12,000 वर्गफीट क्षेत्र में अवैध क्लब भी बना दिया गया है।
सबसे गंभीर आरोप खसरा नंबर 55 और 56 की शासकीय भूमि एवं तालाब के कब्जे को लेकर है, जिसका कुल रकबा 14 एकड़ से अधिक बताया गया है। समिति का दावा है कि बिल्डर ने इस शासकीय जमीन को भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बेच दिया है।
पदाधिकारियों ने बताया कि इस मामले की शिकायत कलेक्टर, निगम आयुक्त, एसडीएम और तहसीलदार से की गई थी, जिस पर जांच समिति भी बनी, लेकिन जांच रिपोर्ट शिकायतकर्ताओं को उपलब्ध नहीं कराई गई। जो रिपोर्ट प्राप्त हुई उसमें राजस्व संबंधित मुद्दों की जांच ही नहीं की गई और शिकायतकर्ताओं को ही गलत बताने का प्रयास किया गया।
‘व्यक्तिगत नहीं, सार्वजनिक हित का मामला’
समिति ने स्पष्ट किया कि यह किसी एक व्यक्ति या समूह का निजी विवाद नहीं है, बल्कि सार्वजनिक हित से जुड़ा गंभीर मामला है। कॉलोनी में सैकड़ों परिवार रहते हैं, जिन्हें अंधेरे में रखकर प्लॉट बेचे गए हैं। उनमें व्यापारी, नौकरीपेशा, वकील व अन्य पेशेवर लोग शामिल हैं।
‘जरूरत पड़ी तो करेंगे आंदोलन’
सोसायटी पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि अगर मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। न्याय की यह लड़ाई चाहे कोर्ट तक क्यों न जाए, वे आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैं।
‘रामा वैली की जमीन सरकारी, फर्जीवाड़े से हुआ निर्माण’
कॉलोनीवासियों का कहना है कि रामा वैली की जमीन मूलतः शासकीय है और बिल्डर ने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से इस पर कब्जा कर कॉलोनी का निर्माण कर डाला। यह गड़बड़ी अब खुलकर सामने आ रही है और प्रशासन से मांग है कि जमीन का सीमांकन कर सच्चाई सामने लाई जाए।
