
लोकसभा चुनाव के पहले यात्रियों को बड़ी राहत कोरोना महामारी के बाद पैसेंजर,मेमू चल रही थी स्पेशल बनकर
स्पेशल सिर्फ नाम ट्रेन वहीं तीन साल में 182 करोड़ की कमाई अब किराए में कटौती
छत्तीसगढ़ वॉच की रिपोर्ट बिलासपुर
लोकसभा चुनाव के पूर्व रेलवे ने यात्रियों को बड़ी राहत दे दी है। कोरोना महामारी के बाद पैसेंजर/मेमू ट्रेनों को स्पेशल ट्रेन नाम से चलाया जा रहा था। इस दौरान यात्रियों को दो से तीन गुना ज्यादा किराया देना पडता था। रेलवे ने इन 3 सालो में 182 करोड़ की कमाई कर ली है करोना काल के बाद स्पेशल के नाम पर 10 रुपए की टिकट 30 रूपए में मिल रही थी यात्री लगातार पैसेंजर/मेमू ट्रेनों को समान्य रूप से चलाने की मांग कर रहे थे। आखिरकार रेलवे ने लोकसभा चुनाव के नजदीक आते ही पैसेंजर मेमू ट्रेनों को स्पेशल बनाकर चलाना बंद कर दिया है। पहले की तरह ट्रेनें समान्य रूप से चलेंगी। इसका सीधा फायदा यात्रियों को मिलेगा। पैसेंजर/मेमू ट्रेन में आसपास स्टेशनों में सफर करने का न्यूनतम किराया 30 रूपए था। लेकिन अब 30 की बजाए मात्र 10 रूपए में यात्री पैसेंजर/मेमू ट्रेनों में रोजाना सफर करने वाले यात्रियों पर किराया कम होने का सीधा असर नजर आएगा। अगर कोई यात्री रोजाना बिलासपुर से जयरामनगर अप-डाउन करता है, तो उसे हर माह 1800 रूपए खर्च करना पड़ता था। लेकिन किराया कम होने के बाद उसे मात्र 600 रूपए खर्च करना पड़ेगा। मतलब हर माह 1200 रूपए की बचत होगी। मतलब बिलासपुर जयरामनगर का किराया पहले 30 रूपए था। वहीं अब इसकी मात्र 10 रूपए टिकट हो गई है। इसी तरह पैसेंजर मेमू ट्रेन में बिलासपुर-रायपुर का किराया 55 रूपए था अब मात्र 25 रूपए हो गया है। रेलवे के इस फैसले से छोटे स्टेशनों में सफर करने वाले यात्रियों को बढ़ी राहत मिली है। यात्री अब कम किराए देकर सफर कर पाएंगे।
कोरोना काल में बढ़ाया था किराया इतना आया अंतर
स्टेशन पहले अब
बिलासपुर-रायपुर 55 25
बिलासपुर-दुर्ग 65 35
बिलासपुर-चांपा 35 15
बिलासपुर-जयरामनगर, 30 से 10, बिलासपुर-पॅड्रारोड 50 से 25, बिलासपुर से करगी रोड 30 से 10 रु है।
वर्ष 2020 में कोरोना महामारी शुरू होते ही रेलवे ने सभी ट्रेन को रद्द कर दिया था। वहीं करीब एक वर्ष बाद ट्रेनों का परिचालन शुरू किया गया। शुरूआत में सभी ट्रेनों को स्पेशल बनाकर चलाया गया। इस दौरान यात्रियों को ज्यादा किराया देना पड़ रहा था। लेकिन वर्ष 2022 में मेल/ एक्सप्रेस ट्रेनों को समान्य कर दिया गया। लेकिन पैसेंजर/मेमू ट्रेनें स्पेशल बनकर ही चल रही थी।
