‘Dreams come at night, implement in the morning’, says Sanjay Joshi
रायपुर/छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के पूर्व सदस्य एवं शिक्षाविद संजय जोशी ने ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में दसवीं,बाहरवीं बोर्ड में विद्यार्थियों के परीक्षा केंद्र बदलने को शिक्षा विभाग के अधिकारियों का तुगलकी फरमान बताया है.
शिक्षाविद संजय जोशी ने कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारी जमीनी हकीकत से कोसों दूर है.विभाग को विद्यार्थियों की सुरक्षा और उनके हितों की चिंता नही है.
ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्र में हायर सेकेंडरी स्कूलों की दूरी 10 से 12 किमी होती है.आंतरिक क्षेत्रों में तो परिवहन व्यवस्था का भी अभाव है.बोर्ड परीक्षा के समय जब विद्यार्थी का एक-एक मिनट कीमती होता है तब उन्हें परीक्षा देने 10 से 12 किमी दूर भेजने का निर्णय अनेक प्रश्नों को जन्म देता है.
अत्यंत आश्चर्जनक पहलू यह है कि शिक्षा अधिकारियों ने ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की छात्राओं की परेशानियों की ओर गौर ही नही किया.छात्राओं के लिए परीक्षा देने इतनी अधिक दूर जाना अत्यंत दुष्कर होगा साथ ही छात्राओं की सुरक्षा की दृष्टि से भी यह उचित नही है.सुदूर आदिवासी क्षेत्रों में तो अच्छी सड़को का भी अभाव है.
श्री संजय जोशी ने कहा कि अभी यह स्तिथि है कि रात को स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सपने आते हैं सुबह वह लागू कर दिए जाते हैं.किसी निर्णय की व्यावहारिकता, उपयोगिता और संभावित परिणाम का कोई विश्लेषण नही होता.
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों का परीक्षा केंद्र बदलने के स्थान पर पुरानी व्यवस्था को ही नया स्वरूप दे सकता था.जैसे परीक्षा केंद्र में बाहरी परीक्षा केंद्राध्यक्ष के साथ-साथ अन्य दो स्कूल के प्राचार्यो को भी सहायक केंद्राध्यक्ष बना सकते थे.राज्य सरकार के तहसीलदार, नायाब तहसीलदार अथवा अन्य विभागों के राजपत्रित अधिकारियों को आब्जर्वर बना कर परीक्षा केंद्र में तीन घंटे के लिए बैठा सकते थे.
शिक्षाविद संजय जोशी ने आरोप लगाया है कि छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल स्वयं की व्यवस्था दुरस्त न करके विद्यार्थियों को सजा दे रहा है.श्री संजय जोशी ने ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में बोर्ड परीक्षा केंद्र बदलने के निर्णय को निरस्त करने की मांग की है.

