दल्ली राजहरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में दल्ली राजहरा भाजपा मंडल द्वारा आयोजित ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम इन दिनों अपने आयोजन से ज्यादा प्रचार पोस्टर को लेकर चर्चा में है।
कार्यक्रम का उद्देश्य भले ही कार्यकर्ताओं और आमजन को संगठन से जोड़ने का हो, लेकिन पोस्टर ने मानो अलग ही कहानी शुरू कर दी है। पोस्टर में भाजपा प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन, जिला अध्यक्ष चेमन देशमुख, जिला महामंत्री सौरभ लूनिया, नगर पालिका अध्यक्ष तोरण साहू और मंडल अध्यक्ष रामेश्वर साहू की तस्वीरें प्रमुखता से नजर आ रही हैं।
लेकिन इसी तस्वीरों की कतार में नगर पालिका उपाध्यक्ष एवं वार्ड क्रमांक 03 से निर्वाचित पार्षद मनोज दुबे की तस्वीर नजर नहीं आ रही है। अब इसे पोस्टर बनाने वाले की चूक माना जाए या तस्वीरों की कोई तयशुदा ‘एडिटिंग पॉलिसी’—यह सवाल स्थानीय राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
आज प्रदेश अध्यक्ष का जन्मदिन, फिर तस्वीर कहां?
दिलचस्प बात यह है कि आज भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव का जन्मदिन भी है, लेकिन कार्यक्रम के प्रचार पोस्टर में उनकी तस्वीर भी दिखाई नहीं दे रही। ऐसे में पोस्टर को देखकर स्थानीय लोगों के बीच सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर तस्वीरें लगाने का फार्मूला क्या था—कौन शामिल हुआ और कौन ‘फ्रेम’ से बाहर रह गया?
एक तरफ जन्मदिन की बधाइयां और दूसरी तरफ जन्मदिन के दिन ही प्रदेश अध्यक्ष की तस्वीर का पोस्टर से गायब होना, चर्चा को और हवा दे रहा है।
पोस्टर ने शुरू कर दिया ‘कयासों का कार्यक्रम’
पोस्टर सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ लोग इसे सामान्य चूक मान रहे हैं, तो कुछ इसे संगठन के भीतर चल रही संभावित खींचतान से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, इन चर्चाओं की पुष्टि के लिए भाजपा मंडल की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
इसलिए पोस्टर में तस्वीर न होने को किसी गुटबाजी का प्रमाण मानना फिलहाल उचित नहीं होगा। आखिर पोस्टर भी कभी-कभी डिजाइन, स्थान या फोटो उपलब्धता जैसी वजहों से किसी की तस्वीर को ‘आराम’ दे देते हैं।
‘आशीर्वाद का दिया’ और तस्वीरों की अपनी-अपनी रोशनी
राजनीति में तस्वीर का अपना महत्व होता है। मंच पर कौन बैठा, पोस्टर में किसका चेहरा कितना बड़ा है और किसका चेहरा नजर नहीं आया—इन सबका अपना राजनीतिक अर्थ निकाला जाता है। यही वजह है कि एक कार्यक्रम का पोस्टर अब कार्यक्रम से ज्यादा चर्चा का विषय बन गया है।
व्यंग्यात्मक रूप से कहें तो ‘आशीर्वाद का दिया’ तो जलने वाला है, लेकिन पोस्टर देखकर सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किस-किस तस्वीर पर रोशनी पड़ी और किस-किस तस्वीर पर अंधेरा रह गया?
स्थानीय जनता अपने-अपने हिसाब से इसके अर्थ निकाल रही है। कोई इसे महज पोस्टर की भूल बता रहा है तो कोई संगठनात्मक समीकरणों से जोड़कर देख रहा है। वहीं कुछ लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि कहीं संगठन में कुछ लोग स्वयं को दूसरों से अधिक महत्वपूर्ण समझने तो नहीं लगे हैं। हालांकि, यह केवल जनचर्चा और कयास हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जवाब पोस्टर देगा या संगठन?
फिलहाल भाजपा मंडल की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि नगर पालिका उपाध्यक्ष मनोज दुबे और प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव की तस्वीरें पोस्टर में क्यों शामिल नहीं की गईं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि यह मामला केवल ‘पोस्टर की भूल’ बनकर रह जाता है या भाजपा मंडल की ओर से तस्वीरों के इस ‘रहस्य’ पर कोई स्पष्टीकरण भी सामने आता है।
क्योंकि कार्यक्रम का नाम भले ही ‘आशीर्वाद का दिया’ हो, लेकिन पोस्टर ने फिलहाल ‘कयासों की लौ’ जरूर जला दी है।

