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कुलदीप निगम वृद्धाश्रम के 37 वर्ष पूर्ण होने पर  वरिष्ठ पत्रकारों एवं समाजसेवियों का सम्मान

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रायपुर। रायपुर के प्रथम वृद्धाश्रम के रूप में 10 सितंबर 1989 को प्रारंभ हुए छत्तीसगढ़ बाल एवं वृद्ध कल्याण परिषद द्वारा संचालित कुलदीप निगम वृद्धाश्रम, माना कैंप, रायपुर ने अपने 37 वर्ष आज पूर्ण कर लिए हैं। । इस अवसर पर वृद्धाश्रम परिसर में “बुजुर्गों का सम्मान और हमारी संस्कृति की पहचान” विषय पर परिचर्चा एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

परिचर्चा की शुरुआत वक्ता राहुल सिंह परिहार ने की। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में बुजुर्गों का सम्मान पूजा के समान माना गया है। नई पीढ़ी को संस्कारवान बनाने और इस परंपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कुलदीप निगम वृद्धाश्रम के अध्यक्ष राजेन्द्र कुमार निगम ने वृद्धाश्रम की स्थापना के उद्देश्य और 37 वर्षों की सेवा यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि शुरुआत में निराश्रित बुजुर्गों की सेवा का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन समय के साथ परिवार से तिरस्कृत और उपेक्षित बुजुर्गों को भी आश्रम में आश्रय देकर उनकी सेवा करने का संकल्प लिया गया। उन्होंने बताया कि दिवंगत बुजुर्गों के देहदान का भी निर्णय लिया गया और अब तक आश्रम के माध्यम से नौ लोगों का देहदान एम्स रायपुर एवं बालाजी मेडिकल कॉलेज, रायपुर में किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि 37 वर्षों के अनेक उतार-चढ़ाव के बावजूद वृद्धाश्रम आज भी बुजुर्गों की निरंतर सेवा के अपने संकल्प पर कायम है।

सभा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार समीर दीवान ने कुलदीप निगम के सामाजिक सरोकारों को याद किया। उन्होंने कहा कि श्री निगम ने प्रदेश के दर्जनों प्रतिभाशाली एवं साहसी बच्चों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

परिचर्चा में वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश शर्मा ने वृद्धाश्रम परिसर की तुलना चार धाम यात्रा से की। उन्होंने कहा कि इस परिसर में पहुंचकर उन्हें जिस प्रकार की शांति और संतोष का अनुभव हो रहा है, वह किसी तीर्थ यात्रा से कम नहीं है। उन्होंने कुलदीप निगम की पत्रकारिता और सामाजिक सक्रियता की सराहना करते हुए कहा कि जब भी समाज के लोगों को किसी प्रकार की समस्या होती थी, श्री निगम सहयोग के लिए हमेशा तत्पर रहते थे।

वहीं वरिष्ठ पत्रकार अनिल पुरोहित ने कुलदीप निगम के हृदय रोग और उनके उपचार से जुड़ी पुरानी स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने बताया कि अविभाजित मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा के सहयोग से श्री निगम की ओपन हार्ट सर्जरी एम्स दिल्ली में हुई थी। उस समय दूरदर्शन पर इसका लाइव प्रसारण भी किया गया था। इस प्रसंग को याद करते हुए श्री पुरोहित भावुक हो गए।

समाजसेवी मोहन चोपड़ा ने निगम परिवार की सेवा भावना को रेखांकित करते हुए कहा कि निगम परिवार का घर किसी अनाथालय से कम नहीं रहा है। कोई भी दुखी अथवा जरूरतमंद व्यक्ति उनके पास पहुंचता है तो उसकी सेवा करना परिवार की प्राथमिकता बन जाती है। उन्होंने कठिन आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद समाजसेवा के क्षेत्र में निगम परिवार के योगदान को अद्वितीय बताया। इस अवसर पर उन्होंने वृद्धाश्रम को प्रति माह एक क्विंटल चावल देने की घोषणा की।

सदानी दरबार के श्री उदय शदाणी ने भी कुलदीप निगम वृद्धाश्रम से अपने लंबे जुड़ाव और निरंतर सेवा कार्य को याद किया। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक निरंतर सेवा कार्य से जुड़े रहना निस्संदेह सराहनीय और प्रेरणादायी है।

इस अवसर पर वृद्धाश्रम के संचालन एवं सेवा कार्यों में सहयोग देने वाले वरिष्ठ पत्रकारों और समाजसेवियों को मुख्य अतिथि पूज्य शदाणी दरबार तीर्थ के सचिव एवं शदाणी सेवा मंडल के अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष श्री उदय शदाणी ने सम्मानित किया। सम्मान पाने वाले वरिष्ठ पत्रकारों में श्री अनिल पुरोहित जी, श्री गिरीश मुक्तिबोध जी, श्री प्रशांत शर्मा जी, श्री अनिल पुसदकर जी, श्री रविंद्र ठेंगड़ी जी, श्री समीर दीवान जी, श्रीमती मंजूषा शर्मा जी, श्री प्रकाश शर्मा जी, श्री बृजेश चौबे जी,  राम अवतार तिवारी जी, श्री जय प्रकाश मिश्र जी, श्री चंद्रकांत दौंड जी, श्री मोहन तिवारी जी और श्री सुधीर शर्मा जी शामिल थे। इसके साथ समाजसेवी श्री ओम प्रकाश जैन जी,श्री मोहन चोपड़ा जी, श्री संजय यादव जी, श्री चंद्रेश शाह जी, श्री एस. के. घर जी, श्रीमती रीता पाल जी और श्री उदय शदाणी जी को भी शाल, श्रीफल एवं अभिनंदन पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार और जानी-मानी एंकर अमृता शर्मा ने किया।

समारोह के अंत में श्री उदय शदाणी जी ने वरिष्ठ पत्रकार अमृता शर्मा सहित छत्तीसगढ़ बाल एवं वृद्ध कल्याण परिषद द्वारा संचालित कुलदीप निगम वृद्धाश्रम के पदाधिकारियों का भीे शाल और श्रीफल देकर सम्मानित किया।

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