MAHTARI VANDAN YOJANA SCAM: Major irregularity in the Mahtari Vandan Yojana! ₹1.93 crore distributed to 1,726 ineligible beneficiaries.
MAHTARI VANDAN YOJANA SCAM: बीजापुर। जिले में महतारी वंदन योजना के तहत वित्तीय अनियमितता का बड़ा मामला सामने आया है। केवाईसी और ऑडिट के दौरान योजना के 1726 हितग्राही अपात्र पाए गए हैं। इन हितग्राहियों को योजना के तहत लगातार राशि का भुगतान होता रहा। रिकॉर्ड के मुताबिक अपात्र हितग्राहियों के खातों में करीब 1 करोड़ 93 लाख रुपये पहुंचने की जानकारी सामने आई है। मामला सामने आने के बाद विभाग ने अब भुगतान की गई राशि की रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
महतारी वंदन योजना के तहत बीजापुर जिले में कुल 42 हजार 884 महिलाएं पंजीकृत हैं। योजना के लाभार्थियों की केवाईसी और रिकॉर्ड के ऑडिट के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे नाम सामने आए, जो योजना की पात्रता के दायरे में नहीं आते थे। इसके बावजूद इन हितग्राहियों को योजना की राशि मिलती रही।
ऑडिट में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, 21 वर्ष से कम उम्र की 501 महिलाओं को कुल 91 लाख 73 हजार 500 रुपये का भुगतान किया गया। वहीं, आयकर के दायरे में आने वाली 141 महिलाओं के खातों में करीब 45 लाख रुपये पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
इसी तरह शासकीय सेवा से जुड़ी महिलाओं को भी योजना की राशि दिए जाने का मामला सामने आया है। ऐसे मामलों में 33 लाख रुपये से अधिक का भुगतान होने की जानकारी रिकॉर्ड में दर्ज है।
ऑडिट के दौरान सबसे गंभीर बात यह सामने आई कि 675 मृत हितग्राहियों के नाम पर भी योजना की राशि जारी होती रही। इन मामलों में कुल 7 लाख 33 हजार रुपये के भुगतान की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा 96 मामलों में एक ही बैंक खाते में दो अलग-अलग हितग्राहियों की राशि पहुंचने की बात भी सामने आई है।
संबंधित अधिकारियों को नोटिस, रिकवरी के निर्देश
मामला सामने आने के बाद विभाग ने संबंधित सीडीपीओ को नोटिस जारी कर अपात्र हितग्राहियों को किए गए भुगतान की रिकवरी के निर्देश दिए हैं। विभागीय स्तर पर अब इन मामलों की जांच के साथ-साथ भुगतान की गई राशि वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
हालांकि, पूरे मामले में आंकड़ों को लेकर भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। विभाग फिलहाल करीब 700 मामलों की बात कह रहा है, जबकि उपलब्ध रिकॉर्ड में 1726 अपात्र हितग्राहियों का आंकड़ा सामने आया है। ऐसे में वास्तविक रूप से कितने अपात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ मिला और कुल कितनी राशि का भुगतान हुआ, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
फिलहाल विभागीय जांच और रिकवरी की कार्रवाई जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही इस वित्तीय अनियमितता की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

