CHHATTISGARH: Rain Threatens Paddy Worth ₹488 Crore! 1.57 Lakh Tonnes of Grain Lying in the Open Across 114 Centres
CHHATTISGARH: रायपुर। छत्तीसगढ़ के 114 संग्रहण केंद्रों में 1.57 लाख अर्थात करीब 487.98 करोड़ रुपये का धान खुले में पड़ा हुआ है। लगातार बारिश में तिरपाल और कैप कवर के नीचे रखे धान में नमी बढ़ने, बोरी भीगने, पानी लगने, सड़न और अंकुरण का खतरा बढ़ रहा है।
सबसे ज्यादा चिंता बस्तर, रायपुर और दुर्ग की है। इन तीन जिलों में ही 51,064.671 टन धान अटका है, जिसकी कीमत करीब 158.30 करोड़ रुपये है। प्रदेश में हर साल धान खरीदी व संग्रहण केंद्रों पर उठाव में देरी, बारिश, सुखा, कीट और चूहों के कारण धान खराब होने के साथ शार्टेज दर्ज होती है। खरीफ 2025-26 में 26 जिलों में लेखा मिलान के दौरान 68,491 टन धान की कमी सामने आई थी। खुले में रखे धान के सड़ने, भीगने और कीटों से औसतन 26 से 30 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ था।
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1.46 लाख क्विंटल धान खराब
बस्तर संभाग में भी जलजमाव और तिरपाल की कमी से करीब 1.46 लाख क्विंटल धान खराब होने की रिपोर्ट है। कस्टम मिलिंग में देरी और पक्के गोदामों की कमी समस्या बढ़ा रही है। शासन ने चावल जमा करने की अंतिम तारीख 30 अप्रैल 2026 तय की थी, लेकिन इस अवधि के पश्चात भी कई मिलरों ने चावल जमा नहीं किया है। जिसे देखते हुए शासन ने कुल 122 मिलरों को नोटिस भी दिया है।
शेष धान के उठाव की भी लगातार समीक्षा हो रही है। लापरवाही बरतने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। – रीना बाबा साहेब कंगाले, सचिव, खाद्य विभाग

