Major Supreme Court ruling! FIRs against NEET protesters quashed; CJP calls off the march.
नई दिल्ली। 20 जुलाई को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के विरोध प्रदर्शन के बाद जिन छात्र प्रदर्शनकारियों पर FIR दर्ज की गई थीं, उन्हें बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नीट प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR को रद कर दिया, सिवाय उन लोगों के जिनका आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मामले रद माने जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट के इस बड़े कदम के बाद, CJP ने दिल्ली में 5 सितंबर को होने वाले अपने प्रस्तावित मार्च को रद कर दिया। कोर्ट का यह आदेश केंद्र सरकार के उस आश्वासन के बाद आया है जिसमें कहा गया था कि 20 जुलाई के CJP विरोध प्रदर्शन को लेकर प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामले वापस ले लिए जाएंगे और भविष्य में इस विरोध प्रदर्शन को लेकर कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।
हालांकि, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल 2,873 लोगों में से कुछ के खिलाफ एक FIR पर आगे बढ़ने की अनुमति दी है, क्योंकि उनका आपराधिक रिकॉर्ड गंभीर रहा है।
CJP ने क्या कहा?
सुनवाई के बाद दास ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत किया, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठाया कि आखिर इन ‘खूंखार अपराधियों’ को समाज में खुलेआम घूमने की इजाजत क्यों दी गई।
पत्रकारों से बात करते हुए दास ने कहा, ‘दिल्ली पुलिस की फेशियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी के आधार पर विरोध वाली जगह पर लगभग 2800 कथित खूंखार अपराधी मौजूद थे, हमने सरकार के साथ बातचीत के दौरान यह बात कही थी कि अगर ये 2,800 खूंखार अपराधी सचमुच वहां मौजूद थे, तो पहला सवाल यह उठता है कि आखिर वे समाज में खुलेआम कैसे घूम रहे थे?
सरकार ने कोर्ट में क्या कहा?
भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र राज्यों ने छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी FIR को रद करने के लिए अर्जी दाखिल की है।
साथ ही, उन्होंने भरोसा दिलाया कि 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी घटनाओं के लिए भविष्य में कोई FIR दर्ज नहीं की जाएगी। मेहता ने कहा कि ये अर्जियां 25 जुलाई को CJP नेताओं को केंद्र द्वारा दिए गए भरोसे को पूरा करने के लिए दाखिल की गई हैं।
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CJI सूर्यकांत ने क्या कहा?
कोर्ट में बहस के दौरान, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि अगर दोनों पक्ष एक-दूसरे से भरोसे के साथ बात करें तो इस मुद्दे को सुलझाया जा सकता है। इस पर मेहता ने जवाब दिया कि दोनों पक्षों ने इस मामले को सकारात्मक तरीके से देखा है। उन्होंने कहा, ‘हम दुश्मन नहीं हैं।’
केंद्र के रुख की सराहना करते हुए, दास ने कोर्ट से कहा, ‘भारत सरकार के सकारात्मक भरोसे और आज उन्हें मिली न्यायिक मान्यता को देखते हुए, और इस कोर्ट द्वारा पारित आदेश को ध्यान में रखते हुए, CJP 5 सितंबर को मार्च के आह्वान को वापस लेना उचित समझता है और आज के आदेश के पालन की उम्मीद करता है। मैं इस फैसले के लिए कोर्ट और दोनों पक्षों के वकीलों का भी धन्यवाद करता हूं।’
तीन महीने में मिले मुआवजे
CJP ने 5 सितंबर को विरोध-प्रदर्शन का आह्वान किया था। उनका आरोप था कि केंद्र ने छात्रों के खिलाफ मामले वापस लेने और पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले NEET उम्मीदवारों के परिवारों को मुआवज़ा देने के अपने वादे पूरे नहीं किए हैं।
जेपी नड्डा ने दिया रिएक्शन
कोर्ट के फैसले पर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने का अपना वादा पूरा कर रही है। साथ ही, उन्होंने 5 सितंबर को होने वाले विरोध प्रदर्शन को रद करने के फैसले का स्वागत किया।
नड्डा ने कहा, ‘छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए, हमने भारत सरकार की ओर से भरोसा दिलाया था कि विरोध करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस ले लिए जाएंगे और भविष्य में उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाएगी।’
नड्डा ने कहा कि केंद्र ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को दिए गए आश्वासन को लागू करने के लिए भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों की सरकारों से सलाह-मशविरा किया था। उन्होंने कहा, ‘इसी क्रम में, हमने भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों की सरकारों से भी बातचीत की और अब हम उस आश्वासन को पूरा कर रहे हैं।’

