प्रदेश के कई आईएएस अफसर हाल के महीनों में विदेश यात्रा पर गए हैं। चर्चा है कि इनमें से कुछ ने अनुमति भी नहीं ली थी। पहले भी बिना अनुमति विदेश यात्रा के मामले सामने आ चुके हैं। एक अफसर तो समय मिलते ही सिंगापुर हो आया करते थे। रमन सरकार ने उन्हें नोटिस भी जारी किया था और फिर चेतावनी दी गई थी। मगर अब इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अब चूंकि धीरे-धीरे बिना अनुमति विदेश यात्रा की चर्चा होने लगी है, तो सरकार सख्त रुख अपना सकती है।
दो साल बाद भी मास्टर प्लान की जांच अधूरी
प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद राजधानी रायपुर के मास्टर प्लान में गड़बड़ी की शिकायतों की जांच के आदेश दिए गए थे। जांच के लिए कमेटी बनाई गई, लेकिन दो साल बाद भी जांच पूरी नहीं हो पाई है।
बताते हैं कि भूपेश बघेल सरकार में आवास एवं पर्यावरण मंत्री रहे मो. अकबर के निर्देश पर राजधानी रायपुर का मास्टर प्लान तैयार हुआ था। मास्टर प्लान में कुछ प्रभावशाली भाजपा नेताओं की सिफारिशों को पूरा महत्व दिया गया था। सरकार बदली तो शिकायतें हुईं, लेकिन कुछ शिकायतें तो भाजपा नेताओं के खिलाफ हो गई हैं। ऐसे में ढाई साल बाद भी जांच समिति के हाथ खाली हैं।
महस्के को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी
छत्तीसगढ़ मेडिकल कॉरपोरेशन के चेयरमैन दीपक महस्के को भाजपा ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी दी है। उन्हें सोशल मीडिया का संयोजक बनाया गया है। अब तक सोशल मीडिया संभाल रहे अमित मालवीय के हटने और दीपक महस्के की नियुक्ति की काफी चर्चा हो रही है।
दीपक महस्के छत्तीसगढ़ में सोशल मीडिया का प्रभार संभाल चुके हैं, लेकिन उन्हें सोशल मीडिया पर लड़ाई लड़ने वाला शख्स नहीं माना जाता है। रसायन शास्त्र के प्रोफेसर रहे दीपक महस्के आरएसएस की पसंद माने जाते हैं। छत्तीसगढ़ में भी वे साय सरकार बनने के बाद आरएसएस और सरकार के बीच पुल का काम कर रहे थे।
लो प्रोफाइल में रहने वाले दीपक महस्के का नाम आरएसएस की तरफ से आगे हुआ था और फिर भाजपा हाईकमान ने उनके नाम पर मुहर लगाई। नितिन नवीन के साथ तो वे काम कर चुके हैं। बाद में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का भी उन्हें भरोसा हासिल हो गया। ऐसे में उनकी नियुक्ति में समस्या नहीं आई।
डॉ.पाठक पर पीएमओ का भरोसा
आम आदमी पार्टी से आए डॉ. संदीप पाठक को भाजपा ने राष्ट्रीय मंत्री का दायित्व सौंपा है। छत्तीसगढ़ के भाजपा नेताओं ने भले ही डॉ. पाठक की नियुक्ति पर उत्साहजनक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन उन्हें पीएमओ का भरोसा हासिल है।
बहुत कम लोगों को मालूम है कि डॉ. पाठक ने हाईकमान के निर्देश पर बांकीपुर उपचुनाव में मतदान से चार दिन पहले दौरा किया था। उन्होंने रिपोर्ट दे दी थी कि बाकीपुर में पार्टी की हार हो रही है। वे आंकड़ों और मतदाताओं के मनोविज्ञान को समझने में माहिर हैं। ईमानदार तो हैं ही, इन्हीं सब वजहों से वे पीएमओ के बेहद करीबी हो गए हैं। आगामी चुनाव में डॉ. पाठक की पार्टी की चुनाव रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका रहेगी।
नगर विकास योजना में कारोबारी की चर्चा
राजधानी रायपुर में तीन नगर विकास योजना पर काम चल रहा है। एक नकटी और आसपास के इलाके का है, जो करीब 1100 एकड़ जमीन में प्रस्तावित है। इसके अलावा एयरपोर्ट के नजदीक एरो सिटी पर काम चल रहा है। आरडीए ने कमल विहार के बाद पिरदा-तुलसी में आवासीय-व्यावसायिक योजना लॉन्च की है।
बताते हैं कि नकटी और छह गांवों की विकास योजना में आधा दर्जन बिल्डर-कॉलोनाइजर शॉर्टलिस्ट हुए हैं। इन सभी का टेक्निकल बीड फाइनल पास हो चुका है। फाइनेंशियल बीड ओपन होना है।
चर्चा है कि एक प्रमुख कारोबारी, जिनका टेक्निकल बीड पास हो चुका है, उनके यहां ईडी ने रेड कर दी है। ईडी ने कारोबारी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायतों को पुख्ता पाया है। कारोबारी की सरकार में अच्छी पकड़ है। अब ऐसे में उन्हें नगर विकास का जिम्मा मिलता है या नहीं, यह देखने वाली बात होगी।
व्यापार कल्याण बोर्ड पर नजरें टिकीं
चैम्बर अध्यक्ष सतीश थौरानी ने भाजपा का दामन थाम लिया, लेकिन अब तक उन्हें कोई पद नहीं मिला है। ऐसे में व्यापार कल्याण बोर्ड का चेयरमैन पद उनके लिए अहम माना जा रहा है। बोर्ड का गठन भले ही अभी नहीं हुआ है, लेकिन भाजपा के संकल्प पत्र में इसका उल्लेख है। थौरानी के नाम की पैरवी एक पूर्व राज्यपाल द्वारा किए जाने की भी चर्चा है।
मगर कुर्सी की दौड़ में अकेले थौरानी नहीं हैं। भाजपा के कई प्रभावशाली नेता बिलासपुर के व्यापारी नेता कमल सोनी के पक्ष में बताए जा रहे हैं। वहीं कुछ नेताओं की पसंद पूर्व अध्यक्ष अमर पारवानी हैं, जिनकी व्यापारियों के बीच मजबूत पकड़ मानी जाती है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि बोर्ड बनता है तो चेयरमैन की कुर्सी किसके हिस्से आती है। फिलहाल दावेदारों की धड़कनें तेज हैं और फैसला जल्द होने की उम्मीद है।

