बिलासपुर: बिलासपुर नगर निगम के करीब 1400 ठेका और टास्क कर्मियों को दिसम्बर के बाद से पारिश्रमिक नही मिला, 4 महीने से ज्यादा हुए वे बिना पारिश्रमिक काम कर रहे कि आज मिलेगा- कल मिलेगा कहकर ठेकेदार गरीब श्रमिकों को घुमाया जा रहा है। ठेकेदार कॉल रिसीव नही कर रहे निगम आयुक्त कह रहे कि वेतन के सम्बन्ध मे किसी ने उनसे न संपर्क किया न किसी ने शिकायत की है। इसलिए सच्चाई है क्या ये पता नही चल सका।
काम से निकाले जाने के डर से पीड़ित ठेका श्रमिक खुलकर बोलने की हिम्मत नही जुटा पा रहे। यह हालात तब है जब शासन निकायों को आदेश जारी कर चुका है कि हर माह के निर्धारित तारीख को ठेका- टास्क दैनिक सभी को पेमेंट करना है, अब सवाल यह उठ रहा कि यदि निगम से हर माह ठेकेदार को बिल भुगतान किया जा रहा तो श्रमिको को समय पर मेहताना क्यो नही दिया जा रहा, और यदि ठेकेदारों को बिल का भुगतान नही किया जा रहा तो दिक्क्त क्या और कहा है। सवाल उन 12 से 1400 मजबूर परिवारों का है जो सुबह से रात तक हाड़तोड़ मेहनत कर रहे। फिर भी उनके हाथ खाली है।
महंगाई के इस दौर में 4-5 माह मेहनताना न मिलने से उन परिवारों का दिन कैसे गुजर रहा होगा इसकी चिंता किसी को नहीं है। इस समय सभी के हालत तंग चल रहा तो गरीबों का क्या हाल होगा, किसी को मकान का किराया चुकाना है तो किसी को बच्चे के स्कूल की फीस, दवाइयों की फ़िक्र है तो किसी को राशन की… सवाल यह उठ रहा कि क्या इनका मानव अधिकार नही है… बताया जा रहा है कि नगर निगम में 12 से 15 ठेकेदारों ने इतने श्रमिकों को काम पर रखा है लेकिन उन्हें पारिश्रमिक नहीं दिया जा रहा है सभी की अपनी मजबूरियां है। आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है।

