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BREAKING : पूर्व पीएम शेख हसीना और पूर्व गृहमंत्री आसदुज्जमान खान कमाल को मिली फांसी की सजा

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नई दिल्ली: इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) ने ‘मानवता के खिलाफ अपराधों’ के मामले में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को दोषी ठहराया है. ट्रिब्यूनल ने उन्हें फांसी की सजा सुनाई है. भारत में रह रहीं शेख हसीना के खिलाफ 227 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं.

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ ट्रिब्यूनल ने जिन मामलों में सज़ा-ए-मौत सुनाई है, वे सभी आरोप बेहद गंभीर हिंसा, साजिश और राज्य शक्ति के दुरुपयोग से जुड़े हैं. कुल पांच आरोपों में से शेख हसीना आरोप 1, आरोप 2 और आरोप 3 में दोषी पाई गईं हैं. उन्हें पहले और दूसरे आरोपों में मौत की सजा मिली है. आइए जानते हैं कि शेख हसीना के खिलाफ वो पांच आरोप कौन से थे…

1. नागरिकों पर हमला कराने का आदेश

हसीना पर आरोप है कि उन्होंने पुलिस और अवामी लीग से जुड़े हथियारबंद लोगों को आम नागरिकों पर हमला करने के लिए उकसाया. इन हमलों में हत्या, हत्या की कोशिश और यातना शामिल थी. अदालत ने माना कि यह हिंसा हसीना के निर्देश और संरक्षण में हुई.

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2. छात्रों पर घातक हथियारों से हमला करवाना

अदालत के अनुसार हसीना ने छात्र विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए घातक हथियार, हेलिकॉप्टर, और ड्रोन इस्तेमाल करने का आदेश दिया. इस आदेश के चलते बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ, जिसे अदालत ने ‘राज्य शक्ति का घोर दुरुपयोग’ माना.

3. छात्र अबू सैयद की हत्या की साजिश

16 जुलाई को बेगम रौकेया यूनिवर्सिटी के छात्र अबू सैयद की हत्या में शेख हसीना को साजिश रचने, हत्या का आदेश देने और अपराध में प्रत्यक्ष भूमिका निभाने का दोषी पाया गया. इस केस को अदालत ने ‘प्राणदंड योग्य अपराध’ करार दिया.

4. छह निहत्थे प्रदर्शनकारियों की हत्या का आदेश

5 अगस्त को ढाका के चांखारपुल में हुए मुठभेड़ में छह निहत्थे प्रदर्शनकारियों की हत्या को अदालत ने ‘सीधे हसीना के आदेश का परिणाम’ बताया. अदालत ने पाया कि हसीना ने सुरक्षा बलों को कार्रवाई के लिए उकसाया, सहयोग दिया और योजना बनाई, जिसके कारण छह लोगों की जान गई.

5. पांच प्रदर्शनकारियों की हत्या, लाशें जलाना और एक को जिंदा जलाना

सबसे भयावह आरोप में कोर्ट ने माना कि हसीना के निर्देश पर सुरक्षाबलों ने 5 प्रदर्शनकारियों को गोली मारकर हत्या की, उनकी लाशें जलाईं, और एक प्रदर्शनकारी को जिंदा जला दिया. ट्रिब्यूनल के मुताबिक यह अपराध क्रूरता की पराकाष्ठा था, जिसे मौत की सजा से कम दंड नहीं दिया जा सकता.

गृह मंत्री को भी मौत की सजा, सरकारी गवाह बने अफसर को मात्र 5 साल की कैद 

अपने फैसले में अदालत ने माना है कि शेख हसीना ने मानवता के खिलाफ अपराध किए हैं. शेख हसीना के साथ-साथ उनकी सरकार में गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल और पुलिस प्रमुख अब्दुल्ला अल-मामून को दोषी पाया गया है. अब्दुल्ला अल-मामून सरकारी गवाह बन गए थे तो उन्हें कम सजा दी गई.

इस अदालत ने पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को भी मृत्युदंड की सजा सुनाई है, जबकि पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामुन जो सरकारी गवाह बन गए थे, को मामले में पांच साल की कैद की सजा सुनाई गई है. अदालत ने शेख हसीना और असदुज्जमां की संपत्ति को भी जब्त करने का भी आदेश दिया है.

फैसले के बाद शेख हसीना का बयान भी सामने आया

बांग्लादेश कोर्ट के फैसले के बाद पूर्व पीएम शेख हसीना ने पहली प्रतिक्रिया दी है. हसीना ने फैसले को पक्षपाती और राजनीति से प्रेरित बताया है. शेख हसीना के बेटे ने पहले ही उन्हें मौत की सजा सुनाए जाने का अंदेशा जताया था और वो सच साबित हो गया.

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