बिलासपुर वॉच

मोदी सरकार 135 वर्षों की ऐतिहासिक धरोहर पर बुलडोजर क्यों चलाना चाहती है ? सरकार बिल्डिंग ही नहीं दिल भी तोड़ रही है – शैलेश

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मोदी सरकार 135 वर्षों की ऐतिहासिक धरोहर पर बुलडोजर क्यों चलाना चाहती है ? सरकार बिल्डिंग ही नहीं दिल भी तोड़ रही है – शैलेश

बिलासपुर।। रेलवे प्रशासन की ओर से स्टेशन के कायाकल्प की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया के चलते रेलवे स्टेशन की ऐतिहासिक इमारत को भी हटाने की बात कही गई है। इन दिनों रेलवे के मनमानी रवैया से शहरवासी वैसे ही परेशान हैं, इस पर पूर्व विधायक शैलेश पांडे ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह एक ऐतिहासिक धरोहर है और इसकी स्थापना 1890 में हुई थी और आज लगभग 135 साल हो गये है इस ऐतिहासिक इमारत को बने,जिसमे समय समय पर थोड़े थोड़े परिवर्तन नागरिकों की सुविधा के लिए होते रहे है और आज अपने पूर्ण रूप में बिलासपुर स्टेशन है और मुंबई हावड़ा मार्ग के मुख्य स्टेशन में आता है जो कि अपनी बेशक़ीमती यादों से भरा हुआ है और बिलासपुर के जज़्बात इस ऐतिहासिक बिल्डिंग से जुड़े हुए है,लेकिन मोदी सरकार इस ऐतिहासिक बिल्डिंग में बुलडोजर चलाने की तैयारी में है जो कि बिलासपुर के लिए दिल तोड़ने जैसी बात है और बिलासपुर के वासियों को ये बात बिलकुल पसंद नहीं आयी है।

रेलवे का अपना मनमाना स्वभाव बिलासपुर के लोगो के साथ तानाशाही जैसा रहा है जबकि बिलासपुर के नागरिकों ने हमेशा ही बिलासपुर के लिए लड़कर अपने अधिकार लिए है इसलिए आज बिलासपुर स्टेशन यहाँ के लोगों की नस नस में बसा है,यात्रियों की सुविधा के लिए बनाया गया ये स्टेशन से केवल यात्रियों की भावनाएँ ही नहीं जुड़ी है केवल बल्कि बिलासपुर की जनता की भावनाएँ भी जुड़ी है।

बिलासपुर मण्डल देश का सर्वाधिक आय देने वाला मण्डल रहा है हमेशा और आज इस सदी में ज़ोन भी बना है और जोन में भी आय देने में अव्वल है तो एसे में मोदी सरकार को और भी ध्यान देना चाहिए न कि बुलडोजर चलाकर भावनाओं को कुचलना चाहिए।आज बिलासपुर में स्टेशन की बिल्डिंग को तोड़ना चर्चा का विषय है और चर्चा ये है कि इसको बचाना चाहिए और कैसे बचाया जायें इसके लिए गंभीरता से मंथन हो रहा है,रेलवे के अधिकारी भी इस विषय पर चिंता कर रहे होंगे और उन्हें बिलासपुर की भावना को समझना होगा न कि नाजीवाद जैसे तानाशाह बनकर फैसला लेना चाहिए।

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