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रावण हमारे कटु वचन का फल है -राम कृष्ण (मानस मित्र )

संतोष ठाकुर : तखतपुर । l नगर के सांस्कृतिक भवन परिसर में अखिल भारतीय श्री राम चरित मानस सम्मेलन एवं श्रीमद् भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ का भव्य आयोजन 30 मार्च से 07 अप्रैल तक रखा गया है। जिसमें आमंत्रित व्यास पंडित श्री रामकृष्ण (मानस मित्र) अलीगढ़ ने सोमवार को कथा में बताया कि जेहि विधि होई धर्म निर्मूला।सो सब करहिं बेद प्रतिकूला ।। जेहिं जेहिं देस धेनु द्विज पावहिं । नगर गाउं पुर आगि लगावहिं ।। जहां पर भी श्राप देने वाले द्विज मिलते, पहले पूछते- हम राक्षस बन गए। वे कहते -हां, तो रावण मारपीट लूटपाट प्रारंभ कर देते और कहते तुमने ही राक्षस बनाया है ।लूटपाट करने कहां जाएंगे ।यदि वे कहते आप तो राक्षस नहीं हो। तो फिर मारपीट लूटपाट प्रारंभ कर देते और कहते ।यदि हम राक्षस नहीं बने। तो तुम्हारा श्राप वचन असत्य हो जाएगा अर्थात हमारे श्राप ,गालियों, दुर्व्यवहार के रूप में प्रकट व्यवहार करने वाले ही रावण हमारे कटु वचनों का फल है। गाय, पृथ्वी, माताएं (मातृशक्ति मात्र) और पशु के साथ अपमान ,अवहेलना, उपेक्षा होती है। वहां क्रोध, मद, लोभ मोह की आग लग ही जाती हैं।कथा सुनने अधिक संख्या में श्रोता समाज उपस्थित रहे।

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