Thursday, February 29, 2024
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इस चुनाव में बसपा, आप व जोगी कांग्रेस पार्टी का सूपड़ा साफ गोंगपा ने एक सीट जीत कर आश्चर्यचकित किया

इस चुनाव में बसपा, आप व जोगी कांग्रेस पार्टी का सूपड़ा साफ
गोंगपा ने एक सीट जीत कर आश्चर्यचकित किया

– सुरेश सिंह बैस
बिलासपुर। हाल ही में 2023 विधानसभा चुनाव में बसपा, आम आदमी पार्टी व जोगी कांग्रेस पार्टी का सुपड़ा पूरी तरह से साफ हो गया है। जोगी कांग्रेस एवं आप पार्टी से इस वर्ष उम्मीद थी की एक दो सीट तो वे ले ही जाएंगे। पर ऐसा कतई नहीं हो सका। वही इस परिप्रेक्ष्य में यह भी बताना बड़ा दिलचस्प होगा की जिस पार्टी का अस्तित्व या जीतने की संभावना कहीं से भी नहीं दिख रही थी उस गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने पाली तानाखार विधानसभा से एक सीट निकाल कर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया। सभी एग्जिट पोल हुआ पूर्वानुमानों में केवल बसपा आप व जोगी कांग्रेस पार्टी की ही चर्चा हो रही थी। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की चर्चा भी नहीं हो रही थी। मगर आश्चर्यजनक तरीके से यह पार्टी पाली तानाखार विधानसभा चुनाव जीतकर यह पार्टी सामने आई ।‌ वहीं साल 2018 के चुनाव में जिले मे तीसरे मोर्चे के तौर पर उभरी जोगी कांग्रेस के अस्तित्व पर तो अब खतरा मंडराने लगा है। वहीं, बसपा और आप जैसी पार्टियां भी इस चुनाव में खासा प्रदर्शन करने में सफल नहीं रहीं। जिले की एक भी सीट पर इन पार्टियों के प्रत्याशी न तो भाजपा की जीत रोक पाए और न ही कांग्रेस के वोट को प्रभावित कर सके। इस बार तखतपुर और बिलासपुर में कांग्रेस को सीट गंवानी पड़ी तो मस्तूरी में स्थानीय नेताओं की नाराजगी और लोगों के विरोध के चलते भाजपा विधायक डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी को हार का सामना करना पड़ा। जिले की छह सीटों में से कोटा, बिल्हा, से सहित कई सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला होने के दावे किए जा रहे थे। यह भी उम्मीद की जा रही थी कि त्रिकोणीय समीकरण में कहीं अपेक्षाकृत कमतर वोट पाने वाली पार्टी का प्रत्याशी बाजी ना मार ले जाए । मगर इन पार्टियों का अस्तित्व कहीं भी ऐसा नजर नहीं आया कि वह भाजपा या कांग्रेस के प्रत्याशी को वोट प्रतिशत से प्रभावित कर पाएं।इसकी एक बानगी देखिए ,मस्तूरी में बसपा के साथ ही आप और जोगी कांग्रेस की एंट्री से चतुष्कोणीय मुकाबला होने का अनुमान था। चारों प्रत्याशियों के बीच कड़ी टक्कर होने का अनुमान था। ऐसे में दावे भी किए जा रहे थे कि भाजपा- कांग्रेस के लिए यह चुनाव आसान नहीं रहेगा, उन्हें आम आदमी पार्टी, बसपा जैसी पार्टियों से भी टक्कर लेनी पड़ सकती है। लेकिन इन पार्टियों ने जो समीकरण बनाए, उसमें कामयाबी नहीं मिल पाई। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान इन दोनों पार्टियों के प्रत्याशियों को जो वोट मिले थे, उन्हें देखा जाए तो ये पार्टियां चुनाव मैदान पर जरूर कूद गई। लेकिन भाजपा और कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशियों के अंदर भय पैदा नहीं कर सकी। बसपा और आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी किसी भी तरह से भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों को टक्कर देते नहीं दिखे और भीड़ को वोट में बदलने नाकाम रहे। जहां पिछले 2018 के विधानसभा चुनाव में बिल्हा, बेलतरा और मस्तूरी की सीट को जोगी कांग्रेस ने इतना प्रभावित किया कि कांग्रेस के लहर में भी यहां त्रिकोणीय मुकाबले में भाजपा को जीत मिल गई थी। वहीं तखतपुर में भी इन पार्टियों के उम्मीदवार का अच्छा प्रदर्शन देखने को मिला था। जिसका यह परिणाम हुआ कि भाजपा की प्रत्याशी हर्षिता पांडे तीसरे नंबर पर पहुंच गई थी। इस बार पार्टी की निष्क्रियता के चलते इनके प्रदर्शन मैं बहुत कमी आ गई।2018 के विधानसभा चुनाव के परिणाम पर नजर डालें तो आम आदमी पार्टी ने जिले की सभी छह सीट पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। लेकिन सभी की जमानत जब्त हो गई थी। कोटा और बिल्हा में तो और भी बुरा हाल था यहां पार्टी को केवल पांच हजार से भी कम वोट मिल पाये थे। लेकिन, इस बार पार्टी के बड़े नेताओं की तैयारी को देखकर अंदाजा लगाया जा रहा था कि आम आदमी पार्टी का अच्छा प्रदर्शन रहेगा। लेकिन ऐसा कुछ भी देखने में नहीं आया। मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो
बीते तीन विधानसभा चुनाव परिणामों में बीजेपी के वोट बैंक में लगातार इजाफा हो रहा है। साल 2003 के विधानसभा चुनाव में डॉ. बांधी को 40 हजार 485 वोट मिले थे तो 2008 में 53915 वोट और साल 2013 के चुनाव में हार के बाद भी वोटों का आंकड़ा बैंसठ हजार को पार कर गया था। बीजेपी का वोट बैंक 2018 के विधानसभा चुनाव में 67950 हो गया। वहीं, इस बार भाजपा ने उससे भी बढ़कर 75356 वोट हासिल किए हैं। लेकिन दुर्भाग्य से भाजपा प्रत्याशी को पराजय ही हाथ लगी। ऐसा माना जाता है की भाजपा के विधायक डॉ कृष्णमूर्ति बांधी को स्थानीय नेताओं और जनता की नाराजगी के चलते हार का सामना करना पड़ा। इसका फायदा कांग्रेस प्रत्याशी दिलीप लहरिया को मिला जो 95497 वोट हासिल कर चुनाव जीत गए। पिछले चुनाव में यहां जोगी कांग्रेस व बसपा गठबंधन को 53843 वोट मिला था, जो इस बार इसके आसपास भी नहीं दिखा। बसपा को इस बार 15583 वोट ही मिले। जबकि, जोगी कांग्रेस की चांदनी भारद्वाज भी खासा वोट हासिल करने में नाकाम रहीं। देखा जाए तो मस्तूरी, बिल्हा, बेलतरा और कोटा में पिछले चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। इन सभी जगहों पर पूर्व मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी की पार्टी जोगी कांग्रेस भाजपा, कांग्रेस के वोटों को खासा प्रभावित किया था। यहां तक कांग्रेस का अभेद्य किला रहे कोटा में जोगी कांग्रेस पार्टी की प्रत्याशी डॉ. रेणु जोगी ने जीत हासिल कर ली थी। लेकिन अजीत जोगी के निधन के इस पार्टी के वजूद को कायम रखने में उनके बेटे अमित जोगी नाकाम रहे। पार्टी ने जिस तरह कांग्रेस-भाजपा के बागियों को मैदान में उतारा था। इससे संभावना जताई जा रही थी कि चुनाव में इसका असर दिखेगा। कोटा विधानसभा में भी चार बार की विधायक रही डॉ. रेणु जोगी महज आठ हजार वोट पर ही सिमट कर रह गईं।

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