बिलासपुर

असंगठित क्षेत्र के प्रवासी मजदूरों की समस्याओं पर आंदोलन संगठित करने मुद्दा समर्थित मजदूर संगठनों की संयुक्त बैठक 19 को*

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असंगठित क्षेत्र के प्रवासी मजदूरों की समस्याओं पर आंदोलन संगठित करने मुद्दा समर्थित मजदूर संगठनों की संयुक्त बैठक 19 को

कमलेश लाभार्थी लव्हात्रे ब्यूरो चीफ

बिलासपुर । पिछले दिनों *लोक सिरजनहार यूनियन (LSU)* ऑफिस बिलासपुर में LSU के साथ *गुजरात की ईंट भट्ठा यूनियन* एवं *छत्तीसगढ़िया बनिहार संगठन* की संयुक्त बैठक में तय किया गया था कि, आगामी दिनों में प्रवासी मजदूरों के लिए आंदोलन संगठित करने व्यापक स्तर पर मजदूर संगठनों की बैठक बुलाई जाकर संयुक्त मोर्चा और उसका कार्यक्रम कैलेंडर बनाई जाय। इस पर दिनांक 19-08-23 को समय 01.00 से 5:00 बजे तक कर्मचारी भवन विवेकानंद उद्यान (कंपनी गार्डन) के मेन गेट के सामने गली, डबरी पारा, बिलासपुर (छ.ग.) में बैठक होगी।
सभी मजदूर संगठन के प्रतिनिधियों को सादर आमंत्रण- अपील है।

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चर्चा निर्णय विषय एजेंडा -/
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(1). छत्तीसगढ़ से लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूर-निर्माण कार्य, ईंटाभट्टा, डोमेस्टिक वर्कर आदि क्षेत्रों में करीब सभी प्रमुखतम राज्यों में पलायन कर / एजेंट के माध्यम या किन्हीं परिचय माध्यम से नियोजित होते हैं।लेकिन सरकार की ओर से जानबूझकर अर्न्तराज्यीय प्रवासी कर्मकार अधिनियम 1979 के अनुसार श्रमिक निवास स्थान व नियोजन कार्यस्थल में प्राथामिक कार्य “पंजीयन” तक नहीं होता। इन स्थितियों में मानव तस्करी के हालात को बढ़ावा मिलता है। इससे श्रमिक (विशेषतौर पर (2)छत्तीसगढ़ी प्रवासी श्रमिक की विशेषता यह कि ये अपने पूरे परिवार के साथ प्रवास पर रहते हैं। उनके आवास चिकित्सा-नागरिक सुविधा का घोर अभाव अमानवीय स्थिति में होता है। 2. श्रमिक और रोजगार प्रदाता / नियोजनकर्ता के बीच कमीशन होल्डर मिडियेटर (सरदार) की भूमिका शोषणकर्ता एजेंट के रूप में रहता है। इसे कानून अनुसार यथासंतुलन, इसके लिए सरकार एक ऐसा प्रवासी श्रमिक बोर्ड बनाऐं जिसमें प्रवासी श्रमिक का पंजीयन हो और रोजगार प्रदाता इस बोर्ड के माध्यम से करार कर प्रवासी श्रमिक नियोजित करें। इस तरह का मॉडल झारखण्ड सरकार द्वारा बनाए जाने की बात आ रही है। इसका अध्यान कर छत्तीसगढ़ सरकार को उत्प्रेरित किये जाने एवं उपयोगी बनाए जाने की जरूरत है क्योंकि बंधुआ मजदूर बनाए जाने के प्रकरण में इनकी भूमिका संदिग्ध होती है। विमुक्त बंधुआ मजदूरों के पुर्नवास पर सरकार का टालमटोल रवैया कि स्थिति पर जानकारी।(3). मजदूरी रेट एवं भुगतान की पारदर्शिता के लिए सक्षम मशीनरी क्या हो ?(4) प्रवासी महिलाओं के बच्चों (बल श्रम पर रोक) एवं विशेष नागरिक सुविधा उपलब्ध कराने संबंधी ।(5). सभी प्रवासी बच्चे, उन्हें शिक्षा-स्कूल उपलब्ध कराया जाना चाहिए। वहां कुछ भी नहीं होता। शिक्षा के अधिकार का खुल्लमखुल्ला उल्लेघन होता है। इस हेतु सरकारी जिम्मेदारी तय होना चाहिए।(6). प्रवासी मजदूर सहायता केन्द्र की स्थापना ।(7). मनरेगा के तहत सभी मजदूरों को (परिवारगत नही) 200 दिनों रोजगार देने की पारदर्शी व्यवस्था हो जिससे फर्जीबाड़ा न हो।(8). छत्तीसगढ़ एवं छत्तीसगढ़ के बाहर (जहां प्रवासी श्रमिक नियोजित होते हो) के श्रमिक संगठनों का संयुक्त उपक्रम बनाना, जिससे जरूरत के वक्त कारगार कदम उठा सकें (9). उक्त मांगों / मुद्दों पर आंदोलन संगठित करने सभी सहमत मजदूर संगठनों का संघर्ष समिति एवं कार्यक्रम कैलेंडर बनाना।(10). प्रवासी मजदूर की समस्याओं एवं निदान के मुद्दों पर राजनैतिक दलों को उनके घोषणा पत्र में शामिल करने पर चर्चा।

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